सिरमटोली फ्लाईओवर लोगों के लिए खुला.:फ्लाईओवर रैंप के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच सीएम हेमंत सोरेन के दो मास्टर स्ट्रोक

लंबे समय से चल रहे विवादों के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट सिरमटोली फ्लाईओवर का गुरुवार को लोकार्पण कर दिया। सिरमटोली चौक से राजेंद्र चौक होते हुए मेकॉन गोलचक्कर तक बने 2.34 किमी लंबे इस फोरलेन फ्लाईओवर पर 355.76 करोड़ रुपए की लागत आई है। नाम दिया है स्व. कार्तिक उरांव फ्लाईओवर। स्व. उरांव फ्लाईओवर रैंप का विरोध करने वाले गुट का नेतृत्व करने वाली पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव के पिता थे। इस फ्लाईओवर के शुरू होने से अब डोरंडा, हिनू, नेपाल हाउस सचिवालय और एयरपोर्ट जाने वालों को बड़ी राहत मिलेगी। सिरमटोली चौक से मेकॉन गोलचक्कर तक 30 मिनट का सफर महज पांच मिनट में पूरा होगा। इससे मेन रोड ओवरब्रिज पर भी जाम से मुक्ति मिलेगी। इस उद्घाटन कार्यक्रम को काफी गोपनीय रखा गया था। बुधवार को झारखंड बंद के बाद अचानक उद्घाटन का कार्यक्रम तय हुआ। रातोंरात मंच तैयार हो गया। जगह-जगह होर्डिंग्स लग गए, लेकिन कहीं उद्घाटन की तिथि अंकित नहीं थी। सुबह करीब 11:30 बजे सामने आया कि गुरुवार को ही इसका उद्घाटन होगा। फिर विश्व पर्यावरण दिवस पर वन भवन में कार्यक्रम में पूजा-पाठ के बाद मुख्यमंत्री ने फ्लाईओवर को आम लोगों के लिए खोल दिया। उद्घाटन के दौरान सिरमटोली मुंडा चौक से मेकॉन चौक तक फ्लाईओवर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। मुंडा चौक और मेकॉन चौक को सील कर दिया गया था। वहां किसी को भी आने की इजाजत नहीं थी। सीएम बोले… किसी की भावना आहत न हो, हमारी सरकार इसका ध्यान रखती है उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने कहा-विवाद और विरोध के बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। लेकिन इतना जरूर कहेंगे कि राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए किसी की बलि चढ़ाना उचित नहीं है। किसी की भावना आहत न हो, हमारी सरकार इसका ख्याल रखत्ती है। इस फ्लाईओवर को स्व. कार्तिक उरांव बाबा के नाम से जाना जाएगा। बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा-सबको पता है कि यह फ्लाईओवर रांची वासियों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में रांची को बेहतर यातायात व्यवस्था उपलब्ध हो, इसके लिए कांटाटोली के बाद यह दूसरा फ्लाईओवर जनता को दिया है। अभी रांची पुरानी व्यवस्था के तहत रची-बसी है। अब हमलोग इसे सजाने संवारने का काम कर रहे हैं। गीताश्री बोलीं… फ्लाईओवर का नामकरण आंदोलन को तोड़ने की राजनीतिक चाल फ्लाईओवर रैंप का विरोध करने वाले गुट का नेतृत्व पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव कर रही हैं। उनके पिता के नाम पर फ्लाईओवर का नाम रखने को उन्होंने आंदोलन को तोड़ने की राजनीतिक चाल बताया। उन्होंने कहा कि सरना समान को बचाने के लिए उनके पिता ने वर्षों तक आंदोलन किया। आदिवासियों की आवाज को देश-विदेश और संयुक्त राष्ट्र संघ में उठाया, उनकी आस्था पर चोट पहुंचाई जा रही है। रांची में सरहुल शोभायात्रा की शुरुआत उनके पिताजी ने ही की थी। आज उसी जगह को बचाने के लिए उनकी बेटी संघर्ष कर रही है। आदिवासी समाज इसे कतई स्वीकार नहीं करेगा। हम जल्दी ही बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। आनन-फानन में उ‌द्घाटन की 2 वजह…. जरूरत पड़ने पर क्रैश बैरियर हटाया जा सकेगाः पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार ने कहा कि किसी की भावना को ठेस न पहुंचे, इसका पूरा ख्याल रखा गया है। सरना स्थल के कारण ही रैंप की लंबाई 114 मीटर से घटाकर 84 मीटर की गई है। किसी कार्यक्रम में जरूरत पड़ने पर क्रैश बैरियर हटाया जा सकेगा। इससे जगह मिल जाएगी। अब रेलवे बोर्ड ने भी सेफ्टी सर्टिफिकेट दे दिया हैं।

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