ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्ल्यूडी) के कार्यपालक अभियंता सनोत सोरेन को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को 60 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी के बाद ग्रामीण कार्य विभाग के कर्मियों में हड़कंप मच गया। पहली बार एसीबी ने विभाग के किसी बड़े अधिकारी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने उनके कडरू ओवरब्रिज के समीप स्थित आवास की भी तलाशी ली। जहां से 16 लाख 89 हजार 500 रुपये नकदी की भी बरामद किए गए। उनकी गिरफ्तारी के बाद यह बात सामने आई है कि ठेकेदार से कुल बिल का 3 प्रतिशत का रिश्वत लिया जाता था। उसके बाद ही बिल पास किया जाता था। अब एसीबी इस बात की भी जांच कर सकती है कि उनके द्वारा कितने बिल अबतक पास किए गए हैं। क्योंकि इस गिरफ्तारी के तार बड़े हो सकते है। ठेकेदार ने रिश्वत देने की जगह एसीबी में शिकायत की उक्त ठेकेदार ने उन्हें रिश्वत देकर काम कराने की जगह एसीबी में शिकायत करने का निर्णय लिया। शिकायत के बाद एसीबी ने सत्यापन कराया, तो मामला सही पाया। सत्यापन करने वाले अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर एसीबी थाने में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई। कार्य पूरा होने के बाद भी नहीं हो पा रहा था भुगतान एसीबी में दर्ज शिकायत में बताया गया है कि रांची के अनगड़ा स्थित जोन्हा प्रखंड में टाटीसिल्वे स्कूल से गुटीदीह होकर करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य कराया गया था। उनका कार्य दिसंबर 2024 में पूरा कर लिया गया था। इसके बावजूद विभागीय जूनियर इंजीनियर ने समय पर मापन पुस्तिका नहीं भरा, जिसके कारण उनका बिल लंबित रह गया। आरडब्ल्यूडी रांची में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित सनोत सोरेन ने कहा कि जब तक कुल बिल की तीन प्रतिशत राशि यानी 60 हजार रुपये रिश्वत में नहीं मिलेंगे, तब तक वे मापी पुस्तिका पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे और भुगतान रुका रहेगा।


