वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों से किया संवाद, देशी तकनीकों से हुए रू-ब-रू

नामकुम| झारखंड राज्य में बीते 29 मई को विकसित कृषि संकल्प अभियान का भव्य शुभारंभ दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र, रांची से हुआ। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ एवं रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी भवेशानंद द्वारा हरी झंडी दिखाकर अभियान की शुरुआत की गई थी। इस अभियान के अंतर्गत राज्य के सभी 24 जिलों के लिए, कृषि विशेषज्ञों की 57 टीमें गठित की गई हैं, जिनमें राज्य के कृषि विज्ञान केंद्रों के एसएमएस, झारखंड स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद संस्थानों (कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, राष्ट्रीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय पादप अनुवांशिकी संसाधन ब्यूरो, राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान का क्षेत्रीय केंद्र हजारीबाग एवं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकगण, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकगण, राज्य सरकार के कृषि विभाग के पदाधिकारी, आत्मा के परियोजना निदेशक, कृषि समन्वयक, बीटीएम, कृषि मित्र एवं प्रगतिशील किसान सम्मिलित हैं। अभियान के दौरान गुमला में टीम ने पाया कि बिशनपुर ब्लॉक के कुछ किसान कच्चे बांस से पानी निकालते हैं और उसे बांस के पानी को सामान्य पानी में मिलाकर धान के स्मट रोग के प्रबंधन में प्रयोग करते हैं। इसी ब्लॉक में कुछ किसान जब धान के खेत में पानी रहता है तो उसमें जले हुए मोबिल को डाल देते हैं और वह पानी में फैल जाता है। विशेषज्ञ कहां-कहां पहुंचे अभियान के सात दिनों के दौरान अनुसंधान केंद्र के कृषि विशेषज्ञों की 10 टीमों द्वारा राज्य के 8 जिलों (बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, रांची, सरायकेला-खरसावां एवं सिमडेगा) कुल 210 गांवों में जाकर बीस हजार से अधिक किसानों से प्रत्यक्ष संवाद कर किसानों से उनकी समस्याओं पर चर्चा की गई, उनके प्रश्नों का उत्तर दिया गया एवं उनकी प्रतिक्रिया ली गई।

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