गोस्सनर एंवेजेलिकल लूथरान कलीसिया, छोटानागपुर व असम प्रथम व्यस्क बपतिस्मा दिवस का 175वां जुबिली वर्ष मना रहा है। सेंट्रल काउंसिल, माता मंडली हेड क्वार्टर्स कांग्रीगेशन, जीईएल चर्च रांची की ओर से शनिवार को तीन दिवसीय कार्यक्रम सह आत्मिक जागृति सभा की शुरुआत की गई। मेन रोड स्थित क्राइस्ट चर्च में मुख्य अतिथि एजी चर्च के पास्टर जॉन टोप्पो व अतिथियों ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। पास्टर जॉन टोप्पो ने अपने संदेश में कहा कि आज का यह दिन पहले के दिनों का स्मरण कराती है, इतिहास से हमें आज के संदर्भ में चेतावनी मिलती है। हम अपने पूर्वजों के द्वारा बताए मार्ग पर चल रहे है कि नहीं। इतिहास से हमें सीख भी मिलती है कि हम सफल हुए या असफल। और आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा भी मिलती है। आज के दिन हमें आकलन करने की जरूरत है कि आज हम कहा है। हमारे पूर्वजों ने जो बीज बोया था, आज कलीसिया उसके अनुसार फल-फूल रही है या नहीं। आज इतिहास को स्मरण करते हुए विश्वास में बढ़ने की जरूरत है। बता दें कि 9 जून 1850 को चार उरांव भाइयों ने बपतिस्मा लिया था। इसी के बाद विश्वास करने वालों का सिलसिला चलने लगा और इसी दिन की याद में हर साल कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम में पादरी निरल बागे ने इतिहास को बताया। एनेम होरो, स्वर्णिम सुरीन, मार्था पूर्ति, मोरिश कश्यप ने बाइबल से पाठ पढ़े। रेव्ह अनूप जोली भेंगरा ने प्रार्थना की अगुवाई की। विशेष निवेदन रेव्ह जॉर्ज शांतिएल केरकेट्टा ने की। अंतिम प्रार्थना पादरी ममता बिलुंग और सीआरसी रांची ने किया। मौके पर बिशप सीमांत तिर्की, पादरी अनुप जॉली भेंगरा सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे। 8 जून को सुबह की प्रार्थना 6 बजे और एडल्ट प्रार्थना 10 बजे होगी। मुख्य संदेश बिशप सीमांत तिर्की सुनाएंगे। चर्च के महासचिव ईश्वरदत्त कंडुलना इतिहास बताएंगे। विशेष प्रार्थना रेव्ह निशांत गुड़िया और रेव्ह आलोक मिंज करेंगे।


