भास्कर न्यूज | अमृतसर भारत-पाक युद्ध के बाद दोनों देशों में बने तनावपूर्ण माहौल के कारण इस बार श्री गुरु अर्जन देव जी का शहीदी पर्व मनाने के लिए एक भी भारतीय श्रद्धालु अटारी सीमा से पाकिस्तान नहीं गया। शहीदी पर्व मनाने के लिए पाक सरकार ने 9 जून से 18 जून तक 10 दिन का शैडूयल जारी किया था। इसके तहत सोमवार को जत्थे को अटारी सीमा सड़क मार्ग से रवाना होना था। इसके तहत 16 जून को पाकिस्तान के लाहौर स्थित गुरुद्वारा डेरा साहिब में मुख्य समागम होना है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत-पाक के बीच अटारी-वाघा सीमा सड़क मार्ग से आवाजाही बंद कर दी गई। इसके चलते कोई भी श्रद्धालु पाकिस्तान जाने को तैयार नहीं हुआ। अब 16 जून को होने वाले मुख्य समागम में केवल लहंदे पंजाब के श्रद्धालु ही शामिल होंगे। 14 जून को गुरुद्वारा डेरा साहिब में श्री अखंड पाठ रखे जाएंगे। 16 जून को सुबह 9 बजे श्री अखंड पाठ का भोग डाला जाएगा। गौरतलब है कि विवादास्पद नानकशाही कैलेंडर के विवाद के चलते भी एसजीपीसी व पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा मनाए जाने वाले शहीदी दिवस की तिथियों में भी भारी अंतर होने के नतीजन भी इस बार जत्था पाक रवाना नहीं हुआ है। इसके बावजूद पीएसजीपीसी के प्रधान रमेश सिंह अरोड़ा व अन्य पदाधिकारियों को उम्मीद थी कि भारत व अन्य मुल्कों से 100-150 श्रद्धालु (पीआर वीजा धारक व मल्टीपल्स वीजा वाले) अवश्य शहीदी पर्व मनाने के लिए निजी तौर पर अथवा ग्रुपों के रूप में भारत की सरजमीं के रास्ते से पाक अवश्य ही पहुंचेगे। इसी उम्मीद के तहत पहले पीएसजीपीसी के प्रधान रमेश सिंह अरोड़ा ने संगत का वाघा सीमा पर स्वागत करने का कार्यक्रम भी बना लिया था, लेकिन भारत के रास्ते से विश्व भर से एक भी श्रद्धालु के यहां न पहुंचने की सूचना के चलते स्वागत कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।


