भास्कर न्यूज | कवर्धा जिला कार्यालय (कलेक्ट्रेट) कवर्धा में रविवार रात 9:30 बजे तीन युवक फर्जी प्रशासनिक अधिकारी बनकर घुसने की कोशिश करते पकड़े गए। ये खुद को डिप्टी कलेक्टर और स्टेनो बता रहे थे। मामला काफी गंभीर है, क्योंकि दो महीने पहले कलेक्ट्रेट को विस्फोटक से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। बहरहाल, गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड को युवकों की हरकतें संदिग्ध लगीं। उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। कवर्धा पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। तीनों को हिरासत में लिया और थाने ले जाकर पूछताछ की गई। पकड़े गए आरोपियों में सम्मी पिता कोमल सिंह ठाकुर निवासी भिलाई, खुद को फर्जी डिप्टी कलेक्टर बता रहा था। आरोपी दुर्गेश सिंह पिता लालसिंह राजपूत निवासी खैरबना कला (कबीरधाम) फर्जी स्टेनो बना था। आरोपी शुभलाल पिता देवी सिंह राजपूत निवासी पटेवा (राजनांदगांव) ड्राइवर था। तीनों ने मिलकर कलेक्ट्रेट में घुसपैठ की साजिश रची थी। बताया जा रहा है कि घटना के दो दिन पहले भी तीनों आरोपी कलेक्ट्रेट आए थे। पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी का किसी भी सरकारी पद से कोई संबंध नहीं है। इन्होंने खुद को अधिकारी बताकर कर्मचारियों से पूछताछ की। अफसरों को भ्रमित करने की कोशिश की। इस मामले की रिपोर्ट सहायक जिला नाजीर अनमोल शुक्ला ने थाना कवर्धा में दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2) में मामला दर्ज किया। तीनों को विधिवत गिरफ्तार किया गया। एसडीओपी कृष्ण कुमार चंद्राकर के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। कबीरधाम पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति अगर खुद को झूठा सरकारी अधिकारी बताता है या संदिग्ध गतिविधियों में शामिल दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। पुलिस ने कहा कि फर्जीवाड़ा और ठगी करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। कलेक्ट्रेट कार्यालय की सुरक्षा में लापरवाही बरती जा रही है। कलेक्ट्रेट में 54 अलग-अलग विभाग संचालित हैं। सुरक्षा के लिए यहां मेन गेट से लेकर कार्यालय के भीतर कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से 5-6 कैमरे बंद हैं। बंद कैमरों को सुधरवाने को लेकर प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है, जो लापरवाही को दर्शाता है।


