सरगुजा जिले में बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के मामले में पुलिस ने चॉइस सेंटर संचालक को यूपी के बलिया से गिरफ्तार किया है। एक वर्ष पूर्व करीब 10 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मिले थे। इस मामले में मणिपुर थाने में जिला अस्पताल अधीक्षक ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी ने 250 रुपए लेकर करीब 200 लोगों का फर्जी सर्टिफिकेट बनाना स्वीकार किया है। जानकारी के मुताबिक, सरगुजा में जिला अस्पताल अंबिकापुर एवं नगर निगम अंबिकापुर द्वारा बनाए गए कई फर्जी प्रमाणपत्र मिले थे। सालों पहले बने इन प्रमाण पत्रों में वर्तमान अधिकारियों के हस्ताक्षर थे। जिला अस्पताल के अधीक्षक ने 20 मार्च 24 को थाना मणिपुर में फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की शिकायत की थी। जन्म प्रमाणपत्र अप्रैल 2013 में जारी किया गया था। चॉइस सेंटर में बनाए गए थे फर्जी प्रमाणपत्र
फर्जी प्रमाण पत्र में कार्यालय का सील लगवाने आए हितग्राही से जानकारी लिए जाने पर उसने ऑनलाइन प्रमाण पत्र च्वाईस सेंटर से बनना बताया गया है। हॉस्पिटल में फर्जी प्रमाणपत्र मिले हैं उनमें वर्ष 2006, 1970, 1984, 2011 का जन्म है। वर्ष 2013 से पूर्व कार्यालय द्वारा प्रमाण पत्र जारी ही नहीं किया जाता था, ना ही कोई रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया था। यूपी से पकड़ा गया आरोपी
जिला चिकित्सालय अंबिकापुर द्वारा जारी किए गए 06 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी मिले। मामले में रिपोर्ट पर मणिपुर पुलिस ने धारा 318(4) BNS का अपराध दर्ज किया गया था। फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने के मामले की लगातार जांच की जा रही थी। मामले में पुलिस ने जांच के बाद बलिया से अक्षय कुमार यादव को गिरफ्तार किया है। अक्षय कुमार यादव (26 वर्ष) ने पूछताछ में बताया कि उसने 250 रुपए की दर से प्रति सर्टिफिकेट लगभग 200 लोगों का फर्जी जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया गया है। मणिपुर थाना प्रभारी अखिलेश सिंह ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।


