फिरोजपुर में सरपंच जशनप्रीत बावा आत्महत्या मामले में नया मोड़ आया है। न्याय के लिए बनाई गई ‘इंसाफ संघर्ष कमेटी’ में पहले ही दिन मतभेद सामने आ गए हैं। आम आदमी पार्टी के युवा विंग के प्रदेश सचिव दीपक शर्मा ने कमेटी से खुद को अलग कर लिया है। दीपक शर्मा ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि वे एसआईटी की जांच के समर्थन के फैसले से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार कल का धरना एफआईआर दर्ज करवाने के लिए था, न कि पुलिस के समर्थन में। विधायक के रणनीति में सफल होने का आरोप उन्होंने यह भी कहा कि विधायक अपनी रणनीति में लगभग कामयाब हो गया। अब जो लोग आगे लगकर सब कुछ देख रहे हैं, वे अपने अनुसार मोर्चा संभालें। मैं इंसाफ को अपनी आंखों के सामने बर्बाद होता नहीं देख सकता। प्रदेश सचिव ने विधायक-पीए के खिलाफ उठाई थी आवाज बता दें कि दीपक शर्मा ने सबसे पहले हलका विधायक फौजा सिंह सरारी और उनके पीए बचित्तर सिंह लाडी के खिलाफ आवाज उठाई थी। उन्होंने शहर के लोगों को एकजुट कर पहला कैंडल मार्च भी आयोजित किया था। सूत्रों का कहना है कि कल के धरने में दीपक शर्मा को नजरअंदाज किया गया। उन्हें मंच पर बोलने का पर्याप्त समय भी नहीं मिला। कुछ लोगों का आरोप है कि किसान नेताओं ने धरने पर अपना नियंत्रण कर लिया था। जानें क्या है पूरा मामला बता दें कि सरपंच जशनप्रीत ने 31 मई को अपने घर में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। जशनप्रीत के परिवार का आरोप है कि विधायक फौजा सिंह सरारी और उनके पीए ने उसे सरपंच बनाने के लिए पहले पंद्रह लाख रुपए की रिश्वत ली थी। उसके सरपंच बनने के बाद, उनके द्वारा करवाए जा रहे विकास कार्यों में रुकावटें डाली जाने लगीं। इतना ही नहीं, अब उनके विरोधी लोगों को बढ़ावा देकर उसे परेशान किया जाने लगा था, जिससे दुखी होकर जशनप्रीत ने आत्महत्या कर ली।


