छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्थित कबीर चबूतरा संत कबीर की तपोभूमि है। यह स्थल नर्मदा उद्गम स्थल से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां कबीर कुटी, कबीर कुण्ड, कबीर चबूतरा और कबीर वटवृक्ष जैसे प्रमुख स्थल हैं। वर्ष 1569 में जगन्नाथपुरी की यात्रा के दौरान संत कबीर यहां रुके थे। स्थान की पवित्रता से प्रभावित होकर उन्होंने यहां कुछ समय बिताया और अपने शिष्यों को ज्ञान दिया। उनके प्रमुख शिष्य धर्मदास महाराज नियमित रूप से यहां उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। 500 वर्ष पुराना है आश्रम कबीर कुटी, जो अब एक मंदिर का रूप ले चुकी है, लगभग 500 वर्ष पुराना आश्रम है। यह सद्गुरु कबीर धरमदास साहब वंशावली प्रतिनिधि सभा दामाखेड़ा के अधीन है। इसकी देखरेख कबीर के वंशज और दामाखेड़ा गद्दी के आचार्य द्वारा नियुक्त महंत करते हैं। कबीर ने समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के आवाज उठाई। वे जाति या संप्रदाय के आधार पर समस्याओं को नहीं देखते थे। अमरकंटक आने वाले अधिकांश श्रद्धालु और पर्यटक कबीर चबूतरा की यात्रा करते हैं। यह स्थान न केवल धार्मिक पर्यटन का केंद्र है, बल्कि कबीर के विचारों और जीवन को समझने का माध्यम भी है।


