प्रभु जगन्नाथ का 108 कलश जल से कराया गया महास्नान, उमड़े श्रद्धालु

सिटी रिपोर्टर | बोकारो सेक्टर-4 स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में बुधवार को देव स्नान पूर्णिमा में भगवान जगन्नाथ को 108 कलश जल से महास्नान करवाया गया। जिस कलश जल से भगवान को स्नान कराया गया, उसमें जल के अलावा दूध, नारियल पानी, गंगा जल मिलाया गया था। इसके बाद षोड़षोपचार पूजन, हवन और आरती की गई। भगवान महास्नान से बीमार होने के कारण 15 दिनों के लिए एकांतवास में चले गए। भगवान को मंदिर के अलग कक्ष में रखा गया है। इस दौरान भगवान भक्तों को दर्शन नहीं देंगे। भगवान के दर्शन नहीं होने से परेशान श्रद्धालु भगवान के जल्द स्वस्थ होने की कामना के साथ तृतीया तिथि से जड़ी-बूटी की दवाइयां लाना शुरू कर ेंगे। इस दौरान सिंहासन पर मुकुट की पूजा होगी। भगवान को गर्म वस्त्र पहनाए जाएंगे। 26 जून को भगवान अपने नवयौवन रूप का दर्शन देंगे। ठीक इसके दूसरे दिन 27 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की पूजा-पांहुडी के बाद दोपहर एक बजे रथ यात्रा निकलेगी। पूजा-पाहुंडी की रस्म बीएसएल के डायरेक्टर इंचार्ज की ओर से निभाया जाएगा। वहां से 5 जुलाई को बहुरा यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ वापस अपने घर लौटेंगे। लेकिन नाराज रुक्मिणी की वजह से दरवाजा नहीं खुलता है। इसकी वजह से प्रभु को तीन दिनों तक बाहर रहना पड़ता है। जगन्नाथ मंदिर में तैयारियां शुरू कर दी गई है। पंडित हिमांशु शेखर दास और पंडित मानस आचार्या ने कहा कि इस साल भी भव्य रथ यात्रा निकलेगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भागवान प्रभु को जड़ी- बूटी का काढ़ा और खिचड़ी अ​र्पित होगा बीमार भगवान को जल्द स्वस्थ होने के लिए दालचीनी, जावित्री, काली मिर्च, लौंग, इलायची को उबालकर काढ़ा और खिचड़ी अर्पित की जाएगी। पंडित मानस आचार्या ने कहा कि भगवान को मीठा पसंद है। इस वजह से बीमारी के दौरान अदरक का रस और काली मिर्च मिलाकर तैयार किए गए पेड़े का भोग लगाया जाएगा। वहीं प्रतिदिन पांच बार होने वाली आरती एक ही बार होगी। रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर से निकल कर सेक्टर-4 स्थित राम मंदिर मौसी बाड़ी पहुंचेंगे। यात्रा में ओडिशा, बंगाल व झारखंड के श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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