दुर्ग्याणा के आयुर्वेद कॉलेज में फर्जीवाड़ा:इंटर्न्स गायब, रिकॉर्ड फर्जी, लगी 55 लाख की पैनल्टी

विक्की कुमार | अमृतसर लोहगढ़ गेट के पास संत तुलसीदास मार्ग पर दुर्ग्याणा के श्री लक्ष्मी नारायण आयुर्वेदिक कॉलेज एंड अस्पताल को नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम अॉफ मेडिसन ने 55 लाख रुपए पैनल्टी लगाई है। कमीशन की ओर से यह पैनल्टी लापरवाही बरते जाने पर लगाई गई है। कमीशन ने 25 अप्रैल 2025 को सरप्राइज इंस्पेक्शन की थी तो टीम को कई खामियां मिली। रिकॉर्ड जांचा गया तो पता चला कि 54 इंटर्नी कॉलेज में इंटर्नशिप के लिए आए हुए हैं, जिनमें 25 गैर हाजिर और एक छुट्टी पर मिला। ई-लॉग बुक मांगी गई तो वह नहीं मिली। मस्टर रॉल भी मांगा गया, टीम ने जब उसे देखा तो वह पढ़ने लायक ही नहीं था। इंटर्नी के छुट्टियों का रिकॉर्ड भी नहीं दिखाया गया। इंटर्नी के ड्यूटी रोस्टर भी प्रॉपर मेंटेन नहीं थे। इंस्पेक्शन के दौरान ओपीडी चलती मिली, मगर अस्पताल में कोई मरीज नहीं मिला। बॉयोमीट्रिक मशीन भी बंद मिली। टीम ने जब काया चिकित्सा विभाग का दौरा किया तो अटेंडेंस रजिस्टर देखा तो उसमें 19 मार्च 2025 से अप्रैल 2025 तक कोई भी हाजिरी लगी नहीं मिली। कॉलेज एंड अस्पताल में टीम को जो भी खामियां दिखीं, उस संबंधी प्रिं​िसपल डॉ. मीनाक्षी अरोड़ा को 20 मई 2025 को तलब करके जवाब मांगा गया। प्रिं​सिपल की ओर से अपना जवाब पत्र भी दिया गया। प्रिं​िसपल की ओर से दिए जवाब से बोर्ड संतुष्ट नहीं रहा और जांच की गई तो उनमें कई रिकॉर्ड फर्जी भी पाए गए। जिसके बाद आयोग ने कॉलेज एंड हॉस्पिटल को 55 लाख रुपए पैनल्टी लगाने के निर्देश जारी किए। वहीं कमीशन के सदस्य डॉ. सिद्धालिंगेश एम कुदारी की ओर से जारी किए गए निर्देश में चेतावनी भी दी गई है कि अगर पैनल्टी राशि नहीं भरी जाती है तो आयोग को विशेष सत्र और आगामी सत्र को रोक दिया जाएगा और सत्र तब तक जारी नहीं किया जाएगा जब तक पैनल्टी राशि भरी नहीं जाएगी। टीम इंस्पेक्शन में पाया गया कि काया चिकित्सा विभाग में इंटर्न्स की हाजिरी 19 मार्च से अप्रैल 2025 तक नहीं लगी थी। प्रिंसिपल ने कहा कि इंटर्न्स की पुरानी उपस्थिति प्रति 19 मार्च 2025 को गुम हो गई थी। 20 मार्च 2025 से नई प्रति में हाजिरी दर्ज की जा रही थी। यह प्रति काया चिकित्सा विभाग की डॉ. प्रियांक भट्ट के पास थी। वह 21 अप्रैल 2025 से छुट्टी पर थी। दुर्भाग्य से प्रति सौंपना भूल गई। 21 अप्रैल 2025 से उपस्थिति केवल बायोमेट्रिक मशीन और मुख्य उपस्थिति रजिस्टर पर दर्ज की जा रही थी। टीम ने जब उनके इस जवाब की जांच की तो पता चला कि उक्त रजिस्टर फैब्रिकेटेड था।

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