रिम्स-टू निर्माण के विरोधी नहीं, मगर सरकारी जमीन पर बने : संघर्ष समिति

आदिवासी समाज कांके, नगड़ी में रिम्स टू बनाने का विरोधी नहीं है। यह निश्चित तौर पर बनना चाहिए। मगर सरकारी जमीन पर, न कि कृषि योग्य जमीन पर। इस मामले में राज्यपाल नगड़ी की जमीन को बचाने के लिए हस्तक्षेप करें, अन्यथा सभी लोग विस्थापित हो जाएंगे। ये बातें बुधवार को नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के द्वारा राजभवन के समक्ष आयोजित धरना के दौरान लोगों ने कही। कहा गया कि एइसी, टाटा जमशेदपुर, बोकारो स्टील सिटी में अभी तक विस्थापन की समस्या समाधान नहीं हुआ है। इसलिए, राज्य सरकार को नगड़ी में कृषि योग्य भूमि को रैयतों के लिए छोड़ देनी चाहिए। रांची में सरकारी जमीन पर ही रिम्स टू का निर्माण कराए। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। धरना में मुख्य रूप से विकास टोप्पो, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, पूर्व मंत्री देव कुमार धान, प्रेम शाही मुंडा, निरंजना हेरेंज, कुंदर्शी मुंडा, सेलिना लकड़ा, आकाश तिर्की, राहुल तिर्की, बलकु उरांव सहित कई लोग शामिल थे। किसी भी कीमत पर नहीं देंगे कृृषि योग्य जमीन नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति की ओर से कहा गया कि किसी भी कीमत पर कृषि योग्य भूमि नहीं देंगे।आदिवासी अगुवाओं ने कहा कि राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का पालन नहीं कर रही है। भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अनुसार 70 प्रतिशत ग्रामीणों की सहमति के बिना जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है। अभी तक नगड़ी की जमीन पर अधिग्रहण करने का कोई लेखा-जोखा नहीं है।

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