धारा 51 का दुरुपयोग:पहले गलत आदेश, फिर गलती छिपाने ‘​कानूनी चूक’ बता रिव्यू ले रहे अफसर

राजस्व मामलों में गलती होने पर पुनर्विलोकन यानी रिव्यू का प्रावधान केवल दुर्लभ मामलों के लिए है। राजस्व अफसर अब इस नियम का खुलेआम दुरुपयोग कर रहे हैं। भू-राजस्व संहिता की धारा 51 के तहत राजस्व अफसरों को अधिकार है कि वे अपने ही आदेश में हुई विधिक गलती को सुधारने के लिए मामले को अपने उच्च अधिकारी के पास पुनर्विलोकन के लिए भेज सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले वरिष्ठ की अनुमति जरूरी है। यह विकल्प विशेष परिस्थितियों के लिए है, मगर अब अधिकारी इसका गलत फायदा उठाकर अपने गलत आदेशों को बचाने के लिए लगातार पुनर्विलोकन भेज रहे हैं। इन मामलों का कोई ऑनलाइन रिकॉर्ड तहसीलों में नहीं रखा जा रहा, जबकि पावती और दस्तावेजों को ऑनलाइन करने के आदेश पहले से दिए गए हैं। दुर्लभ के लिए नियम, यहां दो साल में 42 केस
विधिक चूक होने पर प्रकरण पुनर्विलोकन के लिए तहसीलदार एसडीएम के पास भेजते हैं। एसडीएम अपर कलेक्टर के पास भेजते हैं। बिलासपुर जिले के दो अपर कलेक्टरों के पास एसडीएम से पुनर्विलोकन के मामले आते हैं। दो साल से मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2023-24 में जहां सिर्फ 14 मामले थे, वहीं 2024-25 में 28 मामले आए। इस तरह दो साल में ही 42 मामले आ चुके हैं। यह है राजस्व संहिता में प्रावधान: भू-राजस्व संहिता में स्पष्ट है कि संभागायुक्त, कलेक्टर स्वप्रेरणा या किसी पक्षकार के आवेदन पर अधीनस्थ किसी राजस्व अफसर द्वारा जारी आदेश की वैधता की जांच कर सकते हैं। अगर किसी राजस्व अफसर को अपने ही आदेश में विधिक चूक होने की जानकारी होती है, तब वह अपने उच्च अधिकारी से रिव्यू के लिए पहले मंजूरी लेगा, फिर मामला अपने उच्च अधिकारी को भेजेगा।

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