अब ऑन्कोलॉजी के चौथे तल्ले पर बनाया जा रहा 80 बेड का एक्सटेंशन वार्ड राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में मरीजों को राहत नहीं है। भर्ती होने के बाद इलाज तो मिलता है, लेकिन बेड मिलने तक की प्रक्रिया थोड़ी जटिल है। कई बार इमरजेंसी में भी बेड खाली नहीं रहने की स्थिति में मरीजों को ट्रॉली में इलाज कराने को विवश होना पड़ता है। प्रतिदिन कई मरीज घंटों ट्रॉली- स्ट्रेचर में लाचार पड़े रहते हैं। उनके परिजन बेड के लिए गुहार लगाते हैं, लेकिन बेड सीमित संख्या में होने से उन्हें बेड नसीब नहीं हो पाता। बेड खाली होने तक मरीज की स्थिति या तो गंभीर हो जाती है या फिर मौत। बेड नहीं रहने के कारण ऑक्सीजन सपोर्ट देने में भी देरी होती है। लेकिन प्रबंधन मरीजों को हो रही इस परेशानी को जल्द दूर करने वाला है। सेंट्रल इमरजेंसी में अभी 40 बेड हैं, पेइंग वार्ड में 20 बेड बढ़ाए गए हैं। लेकिन ये भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में ऑन्कोलॉजी बिल्डिंग के चौथे तल्ले पर 80 बेड का इमरजेंसी एक्सटेंशन बन रहा है। वार्ड में बेड व अन्य संसाधन लगाए जा रहे हैं। प्रबंधन की मानें तो अगले माह से यह फंक्शनल हो जाएगा। जरूरत के अनुसार नर्सिंग और टेक्निकल स्टाफ की भी होगी तैनाती: प्रबंधन की ओर से बताया गया कि नए वार्ड में डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मियों की भी प्रतिनियुक्ति होगी। यहां मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट, मॉनिटर, जरूरी दवाएं और अन्य आपात सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पेइंग वार्ड में भी बढ़ाए गए थे 20 बेड मरीजों की परेशानी देखते हुए इससे पहले पेइंग वार्ड में भी इमरजेंसी मरीजों के लिए 20 बेड बढ़ाए गए थे। लेकिन रिम्स की बड़ी सेवाओं और राज्यभर से आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए यह व्यवस्था भी नाकाफी साबित हो रही थी। यही वजह है कि अब एक पूर्ण इमरजेंसी एक्सटेंशन की आवश्यकता महसूस की गई, जो लगभग बन कर तैयार है। अगले महीने उसे चालू कर दिया जाएगा। एक्सटेंशन वार्ड में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी
ऑन्कोलॉजी बिल्डिंग के चौथे तल्ले पर बनाए जा रहे इस 80 बेड वाले एक्सटेंशन वार्ड को पूरी तरह सेंट्रल इमरजेंसी से जोड़ा जाना है। इसमें दोनों तरफ मरीजों के लिए वार्ड तैयार किए गए हैं। सिविल वर्क, फॉल्स सीलिंग, विद्युत व्यवस्था, पंखे, लाइटिंग और ऑक्सीजन पाइपलाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है। एक हिस्से में बेड लगा दिए गए हैं, जबकि दूसरे हिस्से में बेड लगाने का कार्य प्रगति पर है। मौजूदा स्थिति गंभीर : इमरजेंसी में मात्र 40 बेड रिम्स की सेंट्रल इमरजेंसी में फिलहाल महज 40 बेड हैं, जबकि यहां रोजाना सैकड़ों गंभीर मरीज पहुंचते हैं। लेकिन सीमित बेड के कारण उन्हें ट्रॉली या स्ट्रेचर पर ही इलाज कराना पड़ता है। ऐसी स्थिति में ऑक्सीजन सपोर्ट, मॉनिटरिंग या अन्य जरूरी सुविधाएं समय पर नहीं मिल पातीं, जिससे मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद तनावपूर्ण होती है। प्रबंधन का दावा : एक्सटेंशन वार्ड से मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने कहा कि मरीजों को किसी परिस्थिति में इलाज से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए व्यवस्था को लगातार दुरुस्त किया जा रहा है। 80 बेड के एक्सटेंशन से ऐसे मरीजों को तुरंत भर्ती किया जा सकेगा, जो इमरजेंसी में समय गंवा रहे थे। रिम्स को राज्य का प्रमुख मेडिकल संस्थान बनाने की दिशा में हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।


