राजधानी में विभिन्न संवेदनशील जगहों पर पुलिस की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अब ई‑बीट सिस्टम की शुरुआत की गई है। इसके लिए बैंक, ज्वेलरी दुकान और शैक्षणिक संस्थान समेत 700 से ज्यादा जगहों को चिह्नित किया गया है जहां क्यूआर कोड लगाया गया है। पेट्रोलिंग करने वाले थाने की गश्ती गाड़ी और पीसीआर को चिह्नित स्थानों पर जाकर ऐप के माध्यम से क्यूआर कोड को स्कैन करने का निर्देश दिया गया है, ताकि उनकी उपस्थिति दर्ज की जा सके। क्यूआर कोड स्कैन करते ही मॉनिटरिंग करने वाले संबंधित अधिकारी यह देख सकेंगे कि कौन सी टीम कहां मौजूद है। जीपीएस के माध्यम से समय और स्थान की भी पूरी जानकारी ऐप में रिकॉर्ड हो जा रही है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर राजधानी में पहली बार ई‑बीट सिस्टम की शुरुआत की गई है। बीट पुलिस ट्रैकर के नाम से डेवलप इस ऐप के बारे में सभी थानेदारों को जानकारी दी गई है। ग्रामीण इलाकों में भी कई थानों की पुलिस ने भी इस ऐप का इस्तेमाल शुरू किया है। वहीं कई थाने ऐसे भी हैं, जहां टेक्निकल फॉल्ट की वजह से नई व्यवस्था शुरू नहीं की जा सकी है। क्यों पड़ी इसकी जरूरत{पेट्रोलिंग पार्टी के नहीं आने की शिकायत दूर होगी। गश्ती में पारदर्शिता आएगी संवेदनशील जगहों पर पुलिस की उपस्थिति सुनिश्चित होगी। रियल‑टाइम ट्रैकिंग। ई‑बीट सिस्टम का क्या होगा फायदा… ई‑बीट सिस्टम शुरू होने के बाद चिह्नित जगहों पर पेट्रोलिंग व पीसीआर को पहुंचना अनिवार्य होगा। बैंक व ज्वेलरी दुकान समेत कई ऐसी जगह हैं, जहां पेट्रोलिंग व पीसीआर को दो या तीन बार पहुंच कर वहां से आने-जाने वालों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। वरीय पुलिस पदाधिकारियों को यह जानकारी भी नहीं मिल पाती थी कि पेट्रोलिंग व पीसीआर की टीम वहां पहुंची है या नहीं। अब ई‑बीट सिस्टम चालू हो जाने के बाद ऐप के माध्यम से ही पूरी जानकारी मिल जाएगी। ई-बीट सिस्टम से हाो सकेगी बेहतर मॉनिटरिंग


