छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने कांकेर कलेक्टोरेट में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य दीपिका शोरी, ओजस्वी मंडावी, सरला कोसरिया और लक्ष्मी वर्मा ने जिले की पांचवीं सुनवाई में 16 प्रकरणों का निराकरण किया। पहले मामले में नरहरपुर की पूर्व जनपद सदस्य ने एक स्थानीय पत्रकार पर बिना साक्ष्य के समाचार प्रकाशित कर छवि खराब करने का आरोप लगाया। सुनवाई के बाद पत्रकार ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने भविष्य में आवेदिका के खिलाफ कोई अनर्गल टिप्पणी न करने की बात कही। पत्नी के रहते दूसरे से रखा संबंध तो दिलाया मुआवजा दूसरे मामले में शिक्षक ने बच्चा नहीं होने के कारण अपनी पत्नी को छोड़ दिया है। अन्य महिला को अवैध रूप से अपने साथ रखा है, जो गर्भवती है। पहली पत्नी की शिकायत पर शिक्षक की सेवा समाप्त की जा सकती है। आयोग की समझाइश के दौरान शिक्षक ने अपनी पहली पत्नी को 3 एकड़ कृषि भूमि का पट्टा और 1 स्कूटी देने की बात कही। साथ ही एकमुश्त भरण-पोषण के लिए ढाई लाख देने को तैयार हुआ है, इससे सुलहनामा करवाते हुए तलाक के लिए तैयार किया गया। बच्ची ने कहा मां के नहीं रहूंगी जन सुनवाई के एक प्रकरण में महिला ने आवेदन दिया कि 11 साल की बेटी पिता के साथ है। बेटी से पूछताछ पर बेटी ने मां के साथ रहने के लिए मना कर दिया, जिसके बाद महिला ने अपनी शिकायत वापस ले ली और अपने पुराने गिले-शिकवे छोड़ पति के साथ रहने को तैयार हुई।


