राजनांदगांव में आपातकाल की वर्षगांठ पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुद्वारा से निकली रैली के साथ हुई, जो नगर पालिक निगम के टाउन हॉल तक पहुंची। टाउन हॉल में आपातकाल की याद में एक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस दौरान 1975 में मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत जेल में बंद किए गए लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में कुलवंत सिंह कक्कड़, मीसा बंदी निर्वाणी की पत्नी बसंतलता निर्वाणी और मीसा बंदी धनुकलाल के परिजन शामिल थे। महापौर ने बताया आपातकाल का इतिहास महापौर मधुसूदन यादव ने कार्यक्रम में आपातकाल के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1971 के आम चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ जयप्रकाश नारायण ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने इंदिरा गांधी को चुनाव में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का दोषी पाया और उन्हें 6 साल तक निर्वाचित पद से वंचित कर दिया। यादव ने कहा कि इसके बाद अपनी सत्ता बचाने के लिए इंदिरा गांधी ने संविधान की धारा 352 का दुरुपयोग करते हुए 1975 में आपातकाल लगा दिया। इस दौरान नागरिकों की अभिव्यक्ति की आजादी छीन ली गई और कई लोगों को मीसा के तहत जेल में बंद कर दिया गया। महापौर ने भारतीय संविधान को देश की आत्मा बताते हुए कहा कि इसके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ उचित नहीं है। इस अवसर पर समाज सेवी कोमल सिंह राजपूत, अपर कलेक्टर प्रेम प्रकाश शर्मा, नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने संविधान के संरक्षण के लिए आपातकाल के दुष्परिणाम को बताया गया। आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आपातकाल से प्रभावित जन नेताओं, पत्रकारों और नागरिकों के सम्मान में उस कालखंड को याद करते हुए यह दिन मनाया जा रहा है।


