नहीं बदले हालात:शहर के 40 वार्डों में ही नालियां और बेहतर सड़कें आउटर के 30 वार्डों अभी गांव जैसे उबड़-खाबड़ रोड

राजधानी के 70 वार्डों में 40 वार्डों में ही बेहतर सड़कें, नालियां और पानी की सुविधा है। ये वार्ड शहर के मुख्य इलाकों वाले हैं। आउटर के 30 वार्डों में अभी भी उबड़-खाबड़ रोड, सड़क पर बहती गंदगी और पानी की दिक्कत बनी हुई है।
राज्य के बनने के बाद शहर का विकास तो हुआ लेकिन पूरा फोकस शहर के मुख्य इलाकों में तक सीमित रहा। जबकि आउटर में स्थित बोरियाखुर्द, डूंडा, जोरा, कचना, आमासिवनी, देवपुरी और डूमरतराई व इसके आस-पास के कई इलाके निगम सीमा में शामिल होने के 13 साल बाद भी गांव जैसे ही हैं। अब शहर के सभी वार्डों का सर्वे कर ये देखा जाएगा है कि कहां कितनी सुविधाएं और कहां कितनी कमियां हैं। इसके लिए पार्षदों और निगम के अफसरों की टीम बनी है। इस टीम की रिपोर्ट के आधार पर शहर के जिस वार्ड में सुविधाएं कम होंगी वहां फोकस कर दिक्कतों को दूर किया जाएगा।
पार्षदों और अफसरों की टीम इसी महीने सर्वे शुरू करेगी है। इसके लिए शहर को चार जोन में बांटा गया है। सर्वे के दौरान जरूरतों को भी चेक किया जाएगा। आउटर के इलाकों में तो दिक्कत है जबकि शहर के प्रमुख वार्डो दिक्कतें नहीं लेकिन जरूरतें बढ़ गई हैं। भास्कर टीम ने निगम की टीम के पहले शहर और आउटर के वार्डों का सर्वे किया। उसी की रिपोर्ट- बोरियाखुर्द बोरिया खुर्द। करीब तेरह साल पहले निगम में शामिल होने के बावजूद यहां का ज्यादातर इलाका अभी भी गांव की तरह है। मकान पक्के बनते जा रहे हैं लेकिन सड़कें कच्ची और उबड़खाबड़ हैं। पूरे इलाके में केवल 25 से 30 फीसदी इलाकों में ही नालियां हैं। अवैध प्लाटिंग के कारण पक्के मकान तो बन रहे हैं लेकिन सडकें नहीं है। पूरे इलाके में एक भी गार्डन नहीं है। यहां लोगों ने बताया कि बोरियाखुर्द गांव में सड़क 10 साल पहले बनी थी। अब तक एक बार भी मरम्मत नहीं हुई। आमासिवनी विधानसभा रोड पर सड्‌डू के आगे आमासिवनी। रोड के दोनों ओर पक्की इमारतें और भव्य स्कूल नजर आते हैं लेकिन बस्ती में घुसते ही गांव का नजारा दिखने लगता है। पूरे इलाके में एक भी पक्की डामर वाली सड़क नहीं है। जो पुल पुलिया पुराने और संकरे थे, वो आज भी उसी स्थिति में हैं। पानी के लिए लोग अभी भी बोर के भरोसे हैं। लोगों ने बताया पुलिया बारिश में भर जाते हैं उसके बाद तो वहां से गुजरना मुश्किल रहता है। पता ही नहीं चलता सड़क कहां और नाला कहां हैं। स्मार्ट सिटी ने भी करोड़ों खर्च किए मगर
रायपुर स्मार्ट सिटी ने भी एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के लिए शहर के भीतर के ही वार्डों को लिया है। जयस्तंभ चौक के चारों ओर करीब 5 किमी के दायरे को ही फोकस किया। इस इलाके में आईटीएमएस, 24 घंटे पानी, नालंदा परिसर, मल्टीलेवल पार्किंग और डीएमएफ फंड से गाईड, लाइब्रेरी, आक्सीजोन इत्यादि तैयार किए हैं।
ऐसा करेंगे सर्वे
वार्डों में मौजूदा सुविधाएं और आवश्यकता ढूंढी जाएगी। इसके लिए वार्डों को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। विकसित वार्ड, आधे विकसित वार्ड और अविकसित वार्ड। भीतर के 16 से 18 वार्ड विकसित वार्ड हैं। यहां लगभग सारी मूतभूत सुविधाएं हैं। 22 से 24 वार्ड आधे विकसित हैं। मूलभूत सुविधाएं तो हैं लेकिन अब राजधानी के मुताबिक विकास की जरूरत हैं। विकास का अंतर दूर करेंगे
सिटी डेवलपमेंट प्लांट में इस अंतर को दूर करते हुए ही प्लानिंग की जा रही है। किन वार्डों में क्या मौजूद सुविधाएं हैं और क्या होना चाहिए। फाइनल रिपोर्ट के आधार पर पूरे शहर के संतुलित विकास के लिए काम होगा और फंड भी मिलेगा।
मीनल चौबे, महापौर रायपुर

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