जशपुर में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा निकाली गई। यहां के प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गजपति महाराज की परंपरागत भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी पत्नी कौशल्या साय के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पूजा-अर्चना की। बता दें कि यह परंपरा पिछले 83 साल से जारी है। 1942 में स्वर्गीय सुदर्शन सतपथी और उनकी पत्नी सुशीला सतपथी ने इसकी नींव रखी थी। समय के साथ यह आयोजन धार्मिक मेले का रूप ले चुका है। पूरे 9 दिनों तक यह कार्यक्रम चलेगा, 5 जुलाई को प्रभु की वापसी होगी। 5 जुलाई को होगी रथयात्रा की वापसी हजारों श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से रथयात्रा में हिस्सा लिया। श्रद्धालुओं ने तीनों भगवानों के रथ की रस्सी खींची। पूरा वातावरण जय जगन्नाथ के जयघोष और भजन-कीर्तन से गुंजता रहा। रथयात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए मौसीबाड़ी पहुंची। तीनों भगवान नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में विराजमान रहेंगे। 5 जुलाई को वापसी यात्रा होगी। भारत की आजादी से पहले मनाया जा रहा उत्सव रथ यात्रा की शुरुआत दोकड़ा में 1942 में हुई थी। इसकी आधारशिला स्वर्गीय सुदर्शन सतपथी एवं उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय सुशीला सतपथी द्वारा श्रद्धा और समर्पण के साथ रखी गई थी। तब से यह परंपरा निरंतर श्रद्धा और उत्साह के साथ निर्विघ्न रूप से जारी है। समय के साथ यह आयोजन अब एक भव्य धार्मिक मेले का रूप ले चुका है, जिसमें श्रद्धालुओं की विशाल सहभागिता देखने को मिलती है। रथ यात्रा के पावन अवसर पर ओडिशा से आमंत्रित कीर्तन मंडलियों ने भक्ति संगीत की मनमोहक प्रस्तुति दीं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। साथ ही रथ यात्रा में अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां भी शामिल रहीं, जो भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा और हमारी सांस्कृतिक विविधता की भव्यता को अत्यंत आकर्षक रूप में प्रदर्शित कर रही थीं। नौ दिनों तक चलेगा धार्मिक पर्व, होंगे विविध कार्यक्रम जगन्नाथ मंदिर समिति दोकड़ा के सदस्यों ने जानकारी देते हुए बताया कि रथ यात्रा महापर्व एक भव्य नौ दिवसीय धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर और दोकड़ा गांव पूरे श्रद्धा और उत्साह से सराबोर रहता है। पूरे महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, संगीतमय प्रस्तुति, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ बच्चों और युवाओं के लिए विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जो पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक रंगों से भर देता है। रथ यात्रा के साथ लगा विशाल मेला रथ यात्रा के उपलक्ष्य में दोकड़ा में एक विशाल मेले का भी आयोजन किया गया है, जो इस उत्सव की शोभा को और अधिक बढ़ा देता है। मेला परिसर में मनोरंजन के लिए झूले, स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल, पारंपरिक हस्तशिल्प की दुकानें और अन्य आकर्षण मौजूद हैं। जो सभी के लिए आनंद का केंद्र बनते हैं। यह आयोजन आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम है।


