राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स को इस बार आवंटित वित्तीय बजट से काफी उम्मीद है। चूंकि पिछले दो वित्तीय बजट का पूरा इस्तेमाल नहीं होने के कारण करीब 931 करोड़ राजकीय कोष में वापस लौटाना पड़ा। लेकिन इधर स्वास्थ्य विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रिम्स को 476 करोड़ की राशि आवंटित कर दी है। यह राशि रिम्स के पीएल खाते में पहुंच चुकी है। यह राशि रिम्स को वेतन व गैर-वेतन मद के लिए दी गई है। इससे न केवल स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन का भुगतान किया जाएगा, बल्कि इससे रिम्स में संसाधन बढ़ाए जाएंगे। दवाओं का स्टॉक पूरा किया जाएगा और नए उपकरण की खरीद व पुराने की मरम्मत कराई जाएगी। राशि का इस्तेमाल तरीके से किया तो रिम्स आए रोगियों को परेशानी कम होगी। रिम्स में इन सुविधाओं को दुरुस्त करने पर ध्यान देने की जरूरत… 1. वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाने पर : वर्तमान में रिम्स की सेंट्रल इमरजेंसी में सीमित संख्या में वेंटिलेटर मशीन हैं। नतीजतन, वेंटिलेटर योग्य गंभीर से गंभीर मरीजों को अब भी घंटों या तो एंबुलेंस के वेंटिलेटर पर रहने को विवश होना पड़ता है, या फिर घंटों इंतजार के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। इसलिए रिम्स में सबसे जरूरी वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाना है। 2. दवा का स्टॉक : रिम्स के विभिन्न विभागों से आए दिन शिकायतें मिलती है कि डॉक्टर बाहर निजी दवा दुकान से दवा मंगवाते हैं। जांच के क्रम में इसकी पुष्टि भी होती है कि जो दवा डॉक्टर ने मंगाई है, वह रिम्स के स्टॉक में उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में प्रबंधन को चाहिए कि वैसी दवाओं की भी सूची बनाकर (चिकित्सकों के साथ बैठक कर) उसका स्टॉक मेनटेन करने पर ध्यान दे। 3. सेंट्रल इमरजेंसी में लगे मॉनिटर को ठीक करना : रिम्स की सेंट्रल इमरजेंसी में करीब 40 बेड हैं। यहां एक-दो मॉनिटर को छोड़ बाकी सभी बंद हैं। इससे समस्या यह होती है कि गंभीर मरीज को भर्ती करने के बाद निरंतर उसकी स्थिति की मॉनिटरिंग नहीं हो पाती। चूंकि मॉनिटर में बीपी, पल्स रेट, रेिस्परेटरी रेट, ईसीजी की निगरानी आसानी से होती है। 4. एमआरआई की तत्काल उपलब्धता : सूचना है कि रिम्स की एमआरआई मशीन खरीद ली गई है, लेकिन मशीन अबतक रिम्स नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में मरीजों को निजी जांच घर में टेस्ट करानी पड़ रही है। प्रतिदिन प्रति मरीजों की जेब से हजारों रुपए खर्च हो रहे हैं। दो साल में राशि खर्च नहीं हुई, लौटा दिए 931 करोड़ रिम्स में बीते दो साल में सुविधा न के बराबर बढ़ी। नतीजतन, दो वित्तीय वर्ष की आवंटित राशि का 20 प्रतिशत भी खर्च नहीं हो सका और छह माह के अंतराल में 931 करोड़ प्रबंधन को वापस लौटाने पड़े। दैनिक भास्कर ने बुधवार के अंक में खबर प्रकाशित कर बताया कि रिम्स में क्या-क्या कमियां रह गईं, जिस पर सुधार करने की गुंजाइश थी। प्रबंधन इस बार भी अगर ध्यान दे तो व्यवस्था दुरुस्त की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आवंटित राशि को खर्च करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इन राशि को रिम्स में मशीन, उपकरण और दवा के क्रय में खर्च किया जाना है। कार्यालय से संबंधित व्यय, आउटसोर्स पर कार्यरत कर्मियों के मानदेय भुगतान और भवन के रख-रखाव आदि (निर्माण कार्य को छोड़कर) पर खर्च करना है। विभाग का निर्देश… इन कार्यों में खर्च करनी है आवंटित राशि


