शराब घोटाला को देखते हुए राज्य की सभी शराब दुकानों का पहले ऑडिट होगा, इसके बाद हैंडओवर- टेकओवर की कार्रवाई शुरू होगी। सभी जिलों के सहायक आयुक्त उत्पाद व अधीक्षक उत्पाद को निर्देश दिया गया है कि वे प्लेसमेंट एजेंसियों से शराब दुकानों व स्टाक की विधिवत तरीके से हैंडओवर-टेकओवर की कार्रवाई करें। स्टॉक का मिलान करें। इससे यह स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि कहां किस पर कितना बकाया है। कितने की शराब बिकी, कितनी स्टाक में हैं। शराब बिक्री के कितने रुपए विभाग के खाते में जमा हुए। इससे शराब घोटाले की अद्यतन जानकारी सामने आएगी। हैंडओवार- टेकओवर की यह कार्रवाई एक जुलाई से एक सप्ताह के भीतर पूरी किए जाने की तैयारी है। पूर्वी सिंहभूम जिले में एक महीने पहले ही यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। रांची शराब घोटाले की जांच में एक नई और बड़ी जानकारी सामने आई है। एसीबी की पूछताछ में गिरफ्तार कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया ने अपने बयान में घोटाले की जड़ कौन था, इसकी जानकारी दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सिंघानिया ने पूछताछ में आरोप लगाया कि तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे इस घोटाले के मुख्य केंद्र में थे। सिंघानिया के मुताबिक, चौबे ने छत्तीसगढ़ के शराब मॉडल को झारखंड में लागू कराने की साजिश रची। इसमें अरुणपति त्रिपाठी को भी शामिल किया गया। त्रिपाठी को जान-बूझ कर सीएसएमसीएल के माध्यम से सलाहकार बनाया गया। इसके बाद झारखंड में उत्पाद नीति लागू की गई। इस नीति से छत्तीसगढ़ की एजेंसियों और डििस्टलरियों को अनुचित लाभ मिला। इन डििस्टलरियों से आई शराब के हर कार्टून पर 300 से 600 रुपए तक की अवैध वसूली की गई। सिंघानिया ने दावा किया कि इस पूरे रैकेट से विनय चौबे को 40 से 50 करोड़ की घूस दी गई। यह रकम त्रिपाठी के जरिए चौबे तक पहुंचाई गई। टेंडर की शर्तों को भी बदला गया। इसका मकसद एक खास सिंडिकेट को फायदा पहुंचाना था। पूरी योजना चौबे की निगरानी में चली। इससे झारखंड की उत्पाद व्यवस्था को कथित तौर पर मुनाफे की मशीन में बदल दिया गया। सिंघानिया का बयान एसीबी के लिए अहम हो गया है। अब विनय चौबे इस पूरे मामले के केंद्र में आ गए हैं। जांच जारी है। आने वाले दिनों में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। एक जुलाई से पूरे राज्य की खुदरा दुकानों के कर्मी सीधे तौर पर उत्पाद विभाग के अधीन आ जाएंगे। उनका मानदेय भुगतान उत्पाद विभाग करेगा। इसके लिए संबंधित जिले के सहायक आयुक्त उत्पाद व अधीक्षक उत्पाद सीधे तौर पर उनके नियंत्री पदाधिकारी होंगे।


