धुर्वा के जगन्नाथ मंदिर से शुक्रवार शाम भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई। शाम 4.35 बजे विष्णु लक्षार्चना अनुष्ठान के बाद जैसे ही मुख्य पुजारी ने ‘जगन्नाथ स्वामी नयनपथगामी भवतु मे’ का उद््घोष किया। हजारों श्रद्धालु धर्म रथ खींचने को उमड़ पड़े। इस दौरान जय जगन्नाथ… के जयघोष से माहौल भक्तिमय हो गया। हर कोई रथ की रस्सी को छूने को आतुर दिखा। शाम 5.33 बजे रथ यात्रा शुरू हुई। लगभग 500 मीटर की दूरी तय कर शाम 7:45 बजे प्रभु जगन्नाथ स्वामी, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसीबाड़ी पहुंच गए। इससे पहले सुबह 3 बजे से ही मंदिर में लंबी कतारें लग गई थीं। सुबह 5 बजे से दर्शन शुरू हुआ। दोपहर 2 बजे दर्शन बंद हुआ। दोपहर 2:20 बजे मंदिर से बलभद्र स्वामी, सुभद्रा माता और भगवान जगन्नाथ विग्रहों को रथ पर विराजमान कराया गया। 5 बार टूटी रस्सी: रथ खींचने के दौरान 5 बार रस्सी टूटी। पहली बार शुरुआत में, दूसरी बार करीब 100 मीटर चलने के बाद रस्सी टूटी। इसके बाद थोड़े-थोड़े अंतराल पर रस्सी टूटती रही। पुरी: 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे; 625 की तबीयत बिगड़ी, 9 की हालत गंभीर प्रज्ञा चौधरी | पुरी ओडिशा के पुरी में सालाना जगन्नाथ यात्रा शुक्रवार को शुरू हुई। हर साल के मुकाबले डेढ़ गुना (10 लाख) श्रद्धालु पहुंचने से रथ मार्ग पर इतनी भीड़ हो गई कि तीनों रथों को आगे बढ़ाने में मशक्कत करनी पड़ी। देर शाम देवी सुभद्रा के रथ के आसपास भीड़ का दबाव बढ़ने से 625 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई। कई बेहोश हुए तो कुछ को मामूली चोटें आईं। एंबुलेंस से इन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन के मुताबिक, 70 जिला अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से 9 की हालत गंभीर है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सबसे आगे रहा बलभद्र का रथ आधे रास्ते पहुंच चुका है। देवी सुभद्रा का रथ 750 मीटर ही पहुंच पाया। भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ मुख्य मंदिर के बाहर ही खड़ा है। वह एक मीटर ही खिसक पाया। तीनों रथों को रात 8 बजे रोकने की घोषणा की गई। अब शनिवार को फिर रथयात्रा शुरू होगी। रथयात्रा पर विशेष- पढ़ें पेज 6 भगवान जगन्नाथ जादूगोड़ा में रथ यात्रा 5 घंटे रोकी, रात 11 बजे फिर रवाना रांची के धुर्वा में निकली रथयात्रा। फोटो : संदीप नाग रथ के साथ आस्था की लहर कुल पेज 16, मूल्य ~6.00 वर्ष 15, अंक 302 विष्णु सहस्त्रनाम पाठ में 1001 श्रद्धालुविष्णु सहस्त्रनाम पाठ में 1001 श्रद्धालु शामिल हुए। पिछली बार 501 लोगों ने अनुष्ठान किया था। रथ यात्रा में इस वर्ष भीड़ पिछले वर्ष से करीब दोगुना दिखी। आप पढ़ रहे हैं देश का सबसे विश्वसनीय और नंबर 1 अखबार सीएम ने सोशल मीडिया पर दी शुभकामना: मैं हर साल भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होता हूं। पर, इस साल मेरे पिता दिशोम गुरुजी के अस्वस्थ रहने की वजह से शामिल नहीं हो सका। उनके जल्दी से स्वस्थ होने की कामना करता हूं। रथयात्रा की शुभकामनाएं। -हेमंत सोरेन रथयात्रा के दौरान नहीं हुई बारिशरांची में गुरुवार रात से ही बादल छाए थे। सुबह करीब 8 बजे तक हल्की बूंदा-बांदी हुई। इसके बाद मौसम साफ हो गया। रथ यात्रा के दौरान बारिश नहीं हुई। शाम 5.33 बजे शुरू हुई रथ यात्रा, रात 7.45 बजे मौसीबाड़ी पहुंचा रथ मौसीबाड़ी जगन्नाथपुर मंदिर जादूगोड़ा| सुंदरनगर में नरवा पहाड़ के पास आदिवासी समाज के लोगों ने शुक्रवार शाम करीब 6.30 बजे भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को रोक दिया। रथ कदमा से बांकु डुगरी की ओर जा रहा था। इससे रथ कमेटी और आदिवासी समाज के बीच तनाव की स्थिति बन गई। कमेटी का कहना है कि यह आयोजन वर्षों से होता आ रहा है। इसे रोकना अनुचित है। वहीं, आदिवासी समाज का तर्क है कि यह क्षेत्र उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। ग्रामसभा की अनुमति के बिना कोई धार्मिक आयोजन नहीं हो सकता। रात करीब 11 बजे मामला सुलझा और रथ रवाना हुआ।


