भास्कर न्यूज | जांजगीर उपभोक्ता गणेशी सतनामी के पति सखाराम की मौत बीमा अवधि में हो गई थी। इसके बावजूद टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ने बीमा राशि देने से इनकार कर दिया। अब जिला उपभोक्ता आयोग जांजगीर ने कंपनी को 19,92,510 रुपए बीमा राशि, 50 हजार रुपए मानसिक कष्ट और 10 हजार रुपए वाद व्यय देने का आदेश दिया है। सखाराम ने 3 सितंबर 22 से 2 सितंबर 23 तक के लिए टाटा एआईए से ग्रुप सम्पूर्ण रक्षक बीमा पॉलिसी ली थी। नामिनी उनकी पत्नी गणेशी सतनामी थीं। बीमा अवधि में ही सखाराम की सामान्य परिस्थितियों में घर पर मौत हो गई। इसके बाद गणेशी ने बीमा राशि की मांग की। कंपनी ने दावा यह कहकर खारिज कर दिया कि सखाराम पहले से क्रोनिक बीमारी से ग्रसित थे और यह जानकारी छिपाई थी। कंपनी ने 7,490 रुपए प्रीमियम लौटाकर दावा अस्वीकार कर दिया। गणेशी ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। अध्यक्ष प्रशांत कुंडू, सदस्य विशाल तिवारी और महिमा सिंह ने दस्तावेजों और तर्कों की जांच की। आयोग ने पाया कि बीमा अवधि में मौत होने पर 20 लाख रुपए का भुगतान तय था। बीमा लेते समय बीमारी की कोई गलत जानकारी नहीं दी थी। सखाराम किसी पूर्व बीमारी से ग्रसित नहीं थे। आयोग ने माना कि बीमा राशि न देकर कंपनी ने सेवा में कमी की। आदेश में कहा कि 20 लाख रुपए में से 7,490 रुपए घटाकर शेष 19,92,510 रुपए, मानसिक कष्ट के लिए 50 हजार देंगे।


