इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने इस एकेडमिक सेशन से ड्रोन टेक्नोलॉजी पर एक सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है। I IGKV देश की चौथी यूनिवर्सिटी है, जिसने इस टेक्नोलॉजी पर ट्रेनिंग देने का काम शुरू किया है। अब तक ये कोर्स देश एनजी रंगा कृषि विश्वविद्यालय (आंध्र प्रदेश), तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (कोयंबटूर) और महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ (महाराष्ट्र) इन तीन यूनिवर्सिटी में ही ऑपरेशनल था। फर्स्ट बैच में फिलहाल अलग-अलग जिलों के 30 साइंटिस्ट को ट्रेनिंग दी गई। अब ये साइंटिस्ट लोकल लेवल पर किसानों को ड्रोन ट्रेनिंग के लिए प्रमोट और इसकी आवश्यकता समझाएंगे। नया कोर्स अलग-अलग कैटेगरी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यूनिवर्सिटी अभी एक विस्तृत शैक्षणिक कैलेंडर तैयार कर रहा है। इसके बाद किसानों, स्टूडेंट और अन्य लोग ट्रेनिंग ले सकेंगे। इस कोर्स में ड्रोन फुटेज का उपयोग करके डेटा प्रोसेसिंग सिखाया जाएगा, जिसमें फोटोग्रामेट्री और थ्रीडी मॉडलिंग शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त कोर्स ड्रोन मॉडल्स के निदान, समस्या निवारण और मरम्मत पर भी केंद्रित होगा। NEP के तहत तैयार की गई है डिजाइन ट्रेनिंग कोर्स को को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत डिजाइन की गई है। IGKV ने कृषि अनुसंधान, नवाचार और विस्तार को बढ़ावा देने के लिए ट्रेनिंग के लिए कैटेलिस्ट फाउंडेशन के साथ समझौता किया है। इस समझौते के तहत वि किसानों को ड्रोन संचालन, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहालिंग का ट्रेनिंग दी जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्रों को किया जाएगा शामिल इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत 27 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्र संचालित है। अब इस सर्टिफिकेट कोर्स को जोड़ा जाएगा। शुरुआत में कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद किसानों को भी ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ड्रोन का किसानी में उपयोग फसल की निगरानी : खाद, कीटनाशक और पानी का छिड़काव: भूमि और मिट्टी का सर्वेक्षण : बीज बोना : नुकसान का आकलन : सटीक खेती :


