भारत की परंपरा में पीढ़ियों से चली आ रही हस्तकला और कौशल को नायब अंदाज से शोकेस किया जा रहा है। जहां देश के कोने-कोने से प्रसिद्ध कारीगिरी और हथकरघा को शहर के आर्ट और फैशन लवर्स के लिए डिस्प्ले किया जाएगा। मौका होगा, शिल्पकारी की ओर से 27 और 28 दिसंबर को जयपुर क्लब में आयोजित होने जा रही दो दिवसीय ‘विंटर वीव्स’ एग्जीबिशन का। कार्यक्रम से जुड़ी तैयारियों के बारे में शिल्पकारी की फाउंडर शिल्पी भार्गव ने बताया कि भारत के हैंडलूम, बुनकर, संस्कृति, शैलियों को संजोने और बढ़ावा देने के उद्देश्य में कार्यरत मंच शिल्पकारी एक बार फिर लौट आया है। जिसमें इस बार सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए देश के विभिन्न प्रसिद्ध और प्राचीन शैलियों में तैयार किए गए विंटर परिधानों को एक छत के नीचे लाया गया है। इस प्रदर्शनी में जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड – कुमाऊं, हैदराबाद, तेलंगाना, गुजरात, नोर्थ ईस्ट, बिहार, पंजाब और उत्तर प्रदेश के राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान और ख्याति प्राप्त बुनकर अपनी कारीगिरी का नमूना पेश करेंगे। बुनकरों और फैशन लवर्स के बीच माध्यम बनी इस प्रदर्शनी में पारम्परिक कारीगिरी के साथ ही स्टाइल स्टेटमेंट, सस्टेनेबिलिटी और इको फ्रेंडली विषयों का भी खास ध्यान रखा गया है। ऐसे में जैकेट, मफलर, कोट, ओवरकोट, शॉल, पोन्चोज, कैप्स, रैप्स, श्रग्स पर जटिल बुनाई के साथ मॉडर्न टच का समावेश देखने को मिलेगा। इसी के साथ ही गुजरात की भुजोड़ी बुनाई और मश्रू व लिनेन पर अजरख हैंड ब्लॉक, पटोला वीव, तेलंगाना का प्रसिद्ध इकत वीव, आंध्रप्रदेश की पेन कलमकरी, कश्मीर के पश्मीना, वेलवेट पर सोजनी की कढ़ाई, उत्तराखंड का मरिनो वूल और एरी, टस्सर व मूंगा सिल्क, बिहार के नवादा सिल्क बुनाई के साथ ही आसामी व कांजीवरम सिल्क साड़ियां व रनिंग मटीरीयल, मिर्ज़ापुर की रग्ज़ व कार्पट्स प्रदर्शनी में चार चांद लगाएंगे। कार्यक्रम के दौरान ‘किस्से बुनकरों के’ चर्चा का आयोजन भी खास होगा। जिसमें बुनकरों के द्वारा उनके संघर्ष, कारीगिरी और कलात्मक सफर पर मंथन किया जाएगा। इसमें पदमश्री से सम्मानित खलील अहमद के नेशनल अवार्डी बेटे रुस्तम शोरब, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जासीर अरफ़त के साथ ही शैलेन्द्र कुमार, वनकर हितेश दयालाल, खत्री हारूनरशीद अब्दुल रज़ाक पैनल में अपने विचार व्यक्त करेंगे।


