मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास में सबसे कम समय के मुख्यमंत्री बनने के लिए नरेशचंद्र सिंह को याद किया जाता है। वे मध्यप्रदेश में संयुक्त विधायक दल की सरकार में 13 मार्च, 1969 से 25 मार्च, 1969 तक मुख्यमंत्री रहे थे। इसमें भी दिलचस्प बात यह है कि नरेशचंद्र सिंह 15 सितम्बर 1968 को विधायक पद से इस्तीफा देकर संविद में शामिल हुए थे और 13 मार्च 1969 को मुख्यमंत्री बनने के बाद 20 मार्च 1969 को ही मुख्यमंत्री पद से अपना त्यागपत्र राज्यपाल को दे दिया था। नरेशचंद्र सिंह 1951-52 में सारंगढ़ सीट से कांग्रेस के विधायक चुने गए थे। बाद में वे 1957, 1962 और 1967 में पुसौर सीट से निर्वाचित हुए थे। वे 1952 में ही लोक निर्माण विभाग के मंत्री बन गए। बाद में 1955 में वे पहले आदिम जाति कल्याण मंत्री बने। वे जुलाई 1967 तक लगातार आदिम जाति कल्याण मंत्री बने रहे। ऐसे बनी थी संविद सरकार
जुलाई 1967 में कांग्रेसी विधायकों के विद्रोह के कारण द्वारका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने पर गोविंद नारायण सिंह के मुख्यमंत्रित्व में संयुक्त विधायक दल की सरकार बनी थी। इसके बाद कांग्रेस के भीतर जबरदस्त राजनीतिक उठा पटक होती रही। कांग्रेस पक्ष में द्वारका प्रसाद मिश्र को नेता पद से हटाकर श्यामाचरण शुक्ल को नेता बनाने के लिए गतिविधियां तेज हो गईं। द्वारका प्रसाद मिश्र किसी भी स्थिति मे श्यामाचरण शुक्ल को नेता नहीं बनने देना चाहते थे। यह संभावना नजर आने लगी कि संविद सरकार के स्थान पर कांग्रेस सरकार फिर से बन सकती है, तब मिश्र जी ने प्रस्ताव किया कि वे नेता पद छोड़ने को तैयार हैं यदि नरेशचंद्र सिंह को कांग्रेस दल का नेता मान लिया जाय। राजा साहब संविद की अंत्येष्टि करने गए हैं…
संविद सरकार बनने के बाद से ही राजनीतिक खींचतान के चलते यह बात सामने आ रही थी कि गोविंद नारायण सिंह के लिए मुख्यमंत्री पद पर बना रहना कठिन है। यह चर्चा भी चलती रही कि नरेशचंद्र सिंह संविद में शामिल हो रहे हंै और उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। बहरहाल, नरेश चंद्र सिंह लगातार कांग्रेस नेताओं के संपर्क में रहे। आखिरकार जब नरेश चंद्र सिंह संविद में शामिल हुए तब द्वारका प्रसाद मिश्र ने प्रतिक्रिया दी थी- राजा साहब संविद की अंत्येष्टि करने गये हैं। सितम्बर 1968 के बाद से संविद में बहुत अधिक उथल-पुथल मची रही किंतु गोविंद नारायण सिंह को हटाया नहीं गया। अक्टूबर 1968 में यह तय हो गया कि गोविंद नारायण सिंह को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा और नरेशचंद्र सिंह मुख्यमंत्री बनेंगे। यह स्थिति मार्च तक बनी रही। किसी तरह मार्च में जब गोविंद नारायण सिंह ने इस्तीफा दिया तब नरेशचंद्र सिंह संविद के मुख्यमंत्री बने। नरेशचंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री बनने के बाद 16 मार्च को दिल्ली में फिर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं से मुलाकात की लेकिन इस बात का खण्डन किया कि वे कांग्रेस में जा रहे हैं। श्यामाचरण बने मुख्यमंत्री
बहरहाल, 20 मार्च को यह सूचित किया गया कि नरेशचंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। विद्रोही कांग्रेसी विधायकों की कांग्रेस में वापसी के साथ, 26 मार्च 1969 को श्यामाचरण शुक्ल के मुख्यमंत्रित्व में सरकार बन गई। इसके बाद नरेशचंद्र सिंह सक्रिय राजनीति से अलग हो गए किंतु उनके परिवार के सदस्य कांग्रेस के विधायक, सांसद और मंत्री लगातार बनते रहे।


