रांची यूनिवर्सिटी में एचओडी और संकायाध्यक्ष (फैकल्टी ऑफ डीन) का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी न सिर्फ चेयर पर बैठ रहे हैं, बल्कि अहम फैसले भी ले रहे हैं, जो वैधानिक नहीं है। यह स्थिति विश्वविद्यालय के स्थापित नियमों और विनियमों का सीधा उल्लंघन है, जिससे इसकी वैधानिक अखंडता और प्रशासनिक व्यवस्था खतरे में पड़ गई है। अकादमिक और प्रशासनिक ढांचा ध्वस्त हो रहा है। शनिवार को भी डॉ. पारस कुमार चौधरी ने सोशल साइंस डीन की हैसियत से यूनिवर्सिटी की सर्वोच्च डिग्री पीएचडी अवॉर्ड से संबंधित कार्यक्रम में अध्यक्षता की। एक सप्ताह पहले यूनिवर्सिटी के एग्जाम बोर्ड की मीटिंग में शामिल हुए, जिसमें नीट यूजी परीक्षा में नकल की आरोपी पर कार्रवाई से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। जब पद पर संबंधित व्यक्ति हैं ही नहीं, तो किस अधिकार से बैठकों में शामिल हो रहे हैं और निर्णय ले रहे हैं। एचओडी और डीन जैसे पद अकादमिक और प्रशासनिक निर्णयों को लेने के लिए अधिकृत होते हैं। एचओडी और डीन अपने पद के अलावा विवि की विभिन्न समितियों और परिषदों के पदेन सदस्य होते हैं। इनके द्वारा लिए गए निर्णय विश्वविद्यालय के संचालन और अकादमिक उत्कृष्टता को प्रभावित करते हैं। सिलेबस का ड्राफ्ट तैयार, पर नहीं ले रहे फैसले कार्यकाल समाप्त होने की सूचना विवि को दी थी इन दो मामलों से समझिए स्थिति… 1. पीजी सोशियोलॉजी : इस विभाग में एचओडी के पद पर डॉ. पारस कुमार चौधरी की नियुक्ति 21 जून 2023 को हुई थी। इनका कार्यकाल 9 दिन पहले 20 जून को पूरा हो गया, लेकिन आजतक पद पर बने हुए हैं। 2. पीजी इतिहास : इस विभाग में एचओडी के पद पर डॉ. सुजाता सिंह की नियुक्ति एक जून 2023 को हुई थी। इनका कार्यकाल 29 दिन पहले 30 मई को पूरा हो गया, लेकिन आज तक पद पर बनी हुई हैं।


