सिफारिशी कार्यक्रम:सरकारी ऑडिटोरियम नहीं निकाल पा रहे खर्च क्योंकि 75% आयोजन सिफारिशी, इसके रिकॉर्ड मेंटेन भी नहीं

राजधानी में संचालित तीन सरकारी सभागार सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। कारण कि यहां सिफारिश कार्यक्रम ज्यादा हो रहे हैं। इन सभागारों की 70 प्रतिशत बुकिंग नेता, विधायक या मंत्रियों के जरिए सिफारिशी हो रही है। आमतौर पर ऐसे आयोजन का पैसा नहीं लगता। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के अनुसार शहर के प्रमुख इनडोर स्टेडियम, शहीद स्मारक और प. दीनदयाल ऑडिटोरियम में पिछले एक साल में कुल 176 कार्यक्रम हुए। इनमें से 132 सिफारिशी तो 44 निजी थे। इस तरह देखें तो तीनों ऑडिटोरियम में 75 प्रतिशत आयोजन सिफारिशी हुए। सूत्रों का कहना है कि सिफारिशी कार्यक्रम के लिए मुख्यालय से फोन आ जाता है। इसके साथ ही इसमें 50 प्रतिशत की छूट भी रहती है। यही कारण है कि सभागार अपने रखरखाव का खर्च नहीं निकाल पा रहे हैं। बता दें कि इनके रखरखाव पर हर साल 8 करोड़ 50 लाख खर्च हो रहे हैं। पीडब्ल्यूडी और निगम 6 करोड़ खर्च कर रहे हैं, जबकि 2 करोड़ शासन को देना पड़ रहा है। माननीयों के कार्यक्रम के नहीं मिलते पैसे एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिफारिशी कार्यक्रम अक्सर होते हैं। कार्यक्रम कौन करा रहा है, किसका फोन आया है, इसकी जानकारी जोन मुख्यालय तक नहीं आती है। निगम मुख्यालय से फोन पर बता दिया जाता है कि इस तारीख को बुकिंग नहीं करना है। इसके बाद उसे रिजर्व रख दिया जाता है। ऐसे कार्यक्रमों की एंट्री नहीं होती और न ही फीस मिलती है। आयोजित होने वाले कार्यक्रम
सांस्कृतिक कार्यक्रम, सभा, वार्षिक उत्सव, फैशन शो, कवि सम्मेलन, गायिकी प्रतियोगिता, सम्मान समारोह, पुरस्कार वितरण, नृत्य प्रतियोगिता, युवक-युवती परिचय सम्मेलन, धार्मिक प्रवचन, विडियो शूटिंग, संगीत कार्यक्रम इत्यादि। मामला गंभीर है…
सार्वजनिक भवन अपने खर्च नहीं निकाल पा रहे हैं। इससे उनकी मरम्मत में दिक्कत आ रही है। क्यों खर्च नहीं निकाल पा रहे हैं। इसकी वजह क्या है। इसमें सिफारिशी बुकिंग कितनी और प्राइवेट बुकिंग कितनी हो रही है। बुकिंग किस हिसाब से हो रही है। मामला गंभीर है, मैं इस बारे में वर्कआउट कर निराकरण निकालता हूं।
अरूण साव, मंत्री पीडब्ल्यूडी

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