पिंगुआ के चीफ सेक्रेट्ररी बनने पर हो सकता है फैसला:अचानक राज्यपाल से मिलने पहुंचे CM साय, कैबिनेट बैठक से पहले मुलाकत पर अटकजलें तेज

30 जून को साय सरकार की अहम कैबिनेट बैठक होने जा रही है। इससे पहले 29 जून की शाम मुख्यमंत्री अचानक राज्यपाल से मिलने पहुंच गए। CM की राज्यपाल से मुलाकात इस माहौल में हुइ है जब ठीक एक दिन बाद प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी अमिताभ जैन रिटायर हो रहे हैं। शासन चलाने के लिए नए मुख्य सचिव की नियुक्ति होनी है। प्रदेश में मंत्री मंडल में नए मंत्रियों को शामिल करने पर भी विचार जारी है। इन सियासी और प्रशासनिक वजहों के चलते मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच हुई मुलाकात को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। CM सचिवालय से मुख्यमंत्री विष्णुदेव और राज्यपाल रामेन डेका की मुलाकात की तस्वीरें जारी की गईं। आधिकारिक तौर पर कहा गया कि राजभवन में मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच मुलाकात हुई। CM साय ने उन्हें शाल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रदेश हित से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। पिंगुआ के नामपर बन सकती है सहमति
प्रदेश के सीनियर IAS अफसरों में से एक मनोज पिंगुआ को प्रदेश का मुख्य सचिव बनाए जाने की सहमति बनती दिख रही है। सूत्रों की मानें तो उनके नाम का एलान हो सकता है। चर्चा ये भी है कि इस डेवलपमेंट की जानकारी मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को दी होगी। मनोज पिंगुआ हाल ही में दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय के कुछ अफसरों से मिलने पहुंचे थे। इसके बाद से अब ये बात तय मानी जा रही है कि पिंगुआ मुख्य सचिव बनाए जा सकते हैं। मनोज पिंगुआ 1994 बैच के आईएएस हैं। साफ-सुथरी छवि के सा​थ बहुत ही शांत प्रशा​सनिक अधिकारी माने जाते हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय की पहली पसंद भी हैं। वर्तमान में मनोज कुमार पिंगुआ गृह,जेल, विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं। मनोज पिंगुआ वर्तमान में छत्तीसगढ़ आईएएस एसोशिएशन के अध्यक्ष हैं। मनोज पिंगुआ लंबे समय से गृह व जेल विभाग के प्रमुख सचिव रहें। वे व्यायसायिक परीक्षा मंडल व माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष भी रहें हैं। मनोज पिंगुआ विभिन्न जिलों में कलेक्टर रहें। जांजगीर– चांपा जिला निर्माण के बाद वे दूसरे कलेक्टर वहां के बने। जिले के पहले कलेक्टर डॉक्टर वीएस निरंजन 31 अक्टूबर सन 2000 को मध्यप्रदेश चले गए थे। उसके बाद मनोज पिंगुआ जांजगीर– चांपा जिले के दूसरे कलेक्टर बनें। वे धमतरी और सरगुजा कलेक्टर भी रहें। 2014 में मनोज पिंगुआ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए थे। प्रतिनियुक्ति पर जाने से पहले पिंगुआ छत्तीसगढ़ में आदिम जाति विकास और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव का पदभार संभाल रहे थे। उन्हें केंद्र में केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर प्रतिनियुक्ति मिली थी। 2016 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस आने के बाद उन्होंने कई विभाग सम्हालें। चर्चा में दूसरा बड़ा नाम सुब्रत साहू
मुख्य सचिव बनाए जाने में दूसरा सबसे बड़ा नाम सुब्रत साहू का सामने आ रहा है। सुब्रत साहू छत्तीसगढ़ कैडर के 1992 बैच के आईएएस है। एक सर्वे ने सुब्रत साहू को देश के 50 प्रभावशाली आईएएस में शामिल किया था। मुख्य सचिव बनाए जाने में दूसरे नंबर पर च्वाइस सुब्रत हैं। वर्तमान में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण रामलला तीर्थ दर्शन योजना में महत्वपूर्व भागीदारी निभा रहें हैं। वो इस वक्त धार्मिक न्यास व धर्मस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। स्थाई DGP भी नियुक्त होना है
IPS अरुण देव गौतम वर्तमान में अस्थायी डीजीपी हैं। प्रदेश में स्थाई DGP को नियुक्त किया जाना है। गौतम राजनेताओं और अधीनस्थ अफसरों की पसंद है। प्रशासनिक पकड़ मजबूत है। डीजीपी चार्ज संभालने के बाद अब तक कंट्रोवर्सी में नहीं फंसे हैं। वहीं प्रदेश में रिकॉर्ड रहा है, जो अस्थायी प्रभारी रहा है, उसे ही स्थायी पद मिला है। इन सब बातों को ध्यान में रखकर प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। लटका है मंत्री मंडल विस्तार का मामला
छत्तीसगढ़ सरकार में नए मंत्रियों का ऐलान अब कभी-भी हो सकता है। नाम तय कर लिए गए हैं, सिर्फ घोषणा बाकी है। इससे पहले चुनावों और निगम-मंडल लिस्ट की वजह से ये ऐलान टलता रहा है। हालांकि मीडिया के बार-बार पूछे जाने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय यही कहते रहे हैं, थोड़ा इंतजार करिए। अचानक राज्यपाल से मुलाकात करने की वजह से मुद्दा फिर से चर्चा में आ चुका है कि शायद अब प्रदेश को मंत्री जल्द मिले। साय कैबिनेट का जब गठन हुआ तो मुख्यमंत्री सहित 12 मंत्री थे हैं। प्रदेश में 13 मंत्रियों को कैबिनेट में रखा जाता रहा है। तो पहले से ही एक खाली था। लोकसभा चुनाव के समय बृजमोहन अग्रवाल ने इस्तीफा दिया, तो 11 मंत्री बचे। कुल मिलाकर 2 मंत्रियों की जगह साय कैबिनेट में इस वक्त खाली है। साय कैबिनेट में सबसे ज्यादा मंत्री सरगुजा संभाग से हैं। रायपुर दुर्ग और बस्तर संभाग से मात्र एक-एक मंत्री हैं। इसलिए इन तीनों संभाग का मंत्रिमंडल में प्रतिनिधत्व बढ़ सकता है।

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