छत्तीसगढ़ के स्कूलों में नया शिक्षा सत्र 16 जून से शुरू हो चुका है। लेकिन अभी तक 60 फीसदी सरकारी स्कूलों के बच्चों तक ही किताबें पहुंच पाई हैं। शेष 40 फीसदी बच्चों तक किताबें पहुंचने में हफ्ते भर का समय और लगेगा। वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों को एक जुलाई से किताबें बांटी जाएंगी। पिछले साल लाखों किताबों के कबाड़ में मिलने के कारण इस बार पाठ्य पुस्तक निगम ने हर किताब का अलग बार कोड बनाया गया है। इससे पता चलेगा कि कौन सी किताब किसके पास है। निजी स्कूल भी हर किताब का बार कोड स्कैन करने के बाद ही किताबें ले जा सकेंगे। इसके लिए छह अलग-अलग डिपो को जिम्मेदारी सौंपी गई है। दरअसल छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़े सरकारी व निजी स्कूलों में कक्षा पहली से दसवीं तक के बच्चों को किताबें नि:शुल्क दी जाती हैं। पिछले सत्र तक स्कूल खुलने से पहले सरकारी स्कूलों तक किताबें पहुंच जाती थी लेकिन लेकिन इस बार किताबें बांटने में काफी देर हो गई है। शेड्यूल के मुताबिक जिन्हें 10 जुलाई को किताबें मिलेगी वहां के छात्रों को 12 जुलाई तक किताबें बांटी जा सकेंगे। यानी स्कूल खुलने के लगभग एक महीने बाद बच्चों तक किताबें पहुंचेंगी। वहीं आत्मानंद स्कूलों में कक्षा तीसरी की किताबें अभी तक नहीं पहुंची है। एक क्लास की छह किताबें तो 12 बार करना होगा स्कैन
किताबों की कालाबाजारी रोकने के लिए बार कोड तैयार किया गया है। इसके लिए एक मोबाइल एप तैयार किया गया है। एक किताब में दो-दो बार कोड तैयार किया गया है। यानी एक कक्षा के लिए छह किताबें हैं तो उसे लेने के लिए 12 बार कोड स्कैन करना होगा। यानी स्कैनिंग में भी काफी समय लगने की संभावना है। बार कोड में किताब का नंबर, संभाग, संकुल और अन्य जानकारियां होंगी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 1.82 करोड़ किताबें बांटेंगे बताया गया है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कुल एक करोड़ 82 लाख किताबें बांटी जाएंगी। इनमें संकुल में एक करोड़ 47 लाख तो नौंवी और दसवीं के बच्चों को 35 लाख किताबें दी जाएंगी। इसी तरह प्रदेश के लगभग 8284 निजी स्कूलों के बच्चों को कुल 55 लाख किताबें दी जाएंगी। इसके लिए रायपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, राजनांदगांव, रायगढ़ और बिलासपुर में स्थाई डिपो बनाए गए हैं जहां से अलग-अलग तिथियों में किताबों का वितरण किया जाएगा। रायपुर जिले के स्कूलों को किताबों का वितरण 4 जुलाई से किया जाएगा। सरकारी स्कूलों के बच्चों को किताबों का वितरण अंतिम चरण में है। जबकि निजी स्कूलों में एक जुलाई से वितरण शुरु करेंगे। पिछले साल हुई घटना के कारण इस बार किताबों में बार कोड डाला गया है। इससे किताबों की मॉनिटरिंग भी की जा सकेगी।
– डिकेश पटेल, जीएम, पाठ्य पुस्तक निगम


