भास्कर न्यूज | नारायणपुर बीते दिनों िजला अस्पताल के डॉक्टरों ने हड़ताल पर रहते हुए भी मानवता की मिसाल दी। जब उन्हें पता चला कि गटापाल, ओरछा से आए एक गंभीर रूप से बीमार मरीज, जिसे हीमो न्यूमोथोरैक्स और छठवीं पसली में फ्रैक्चर थी, तो उसे आपातकालीन ऑपरेशन थियेटर में भर्ती कर देर रात में डॉ.आदित्य केक्ति और ओटी असिस्टेंट लिंगा ने मिलकर इंटरकोस्टल ड्रेनेज की प्रक्रिया सफलतापूर्वक की। जिससे मरीज की स्थिति अभी बेहतर है और वह खतरे से बाहर है। दूसरी ओर दो युवक जो सड़क हादसे का शिकार हुए थे जिनमें एक के खोपड़ी और पैर का हड्डी फ्रैक्चर था। वहीं दूसरे के हाथ और पैर की हड्डी चूरचूर हो गई थी। उनका भी देर रात डॉ विनोद, डॉ मनोज, डॉ आदित्य, डॉ हिमांशु, डॉ धनराज, डॉ उत्तम की टीम ने न केवल प्राथमिक उपचार किया, बल्कि जटिल रक्त स्राव को काबू कर सेंट्रल लाइन के माध्यम से खून की आपूर्ति कर उन्हें मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया। इस प्रकार की आपातकालीन सेवा के संचालन से यह साफ जाहिर है कि डॉक्टरों का यह विरोध केवल आत्मसम्मान की रक्षा के लिए है, न कि मरीजों के जीवन के प्रति उदासीनता। वे जानते हैं कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी क्या है और ऐसे समय में भी वे अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। यह घटना डॉक्टरों की नैतिक जिम्मेदारी, मानवीय संवेदना और समर्पण का प्रमाण है, जो यह दर्शाती है कि वे हर परिस्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए तत्पर हैं। नारायणपुर जिला अस्पताल के इन स्वास्थ्य कर्मियों का यह समर्पण प्रशंसा के योग्य है।


