झारखंड में हुए शराब घोटाला मामले में आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। चौबे पहले शराब घोटाला में गिरफ्तार हुए। फिर आय से अधिक संपत्ति मामले में फंसे। अब एक बार फिर वे हजारीबाग में 2.75 एकड़ जमीन मामले में घिर गए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) शराब घोटाला मामले की अनुसंधान कर रही है। एसीबी ने शराब घोटाले में विनय कुमार चौबे को 20 मई को गिरफ्तार किया था। उन पर प्लेसमेंट एजेंसियों के साथ मिली भगत कर षडयंत्र व कूटरचना करते हुए 38 करोड़ रुपए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। अनुसंधान के दौरान एसीबी इस घोटाले में परत दर परत खोलती जा रही है। कई गंभीर आरोप और लगे हैं। अनुसंधान के दौरान ही विनय चौबे पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला भी सामने आया है। सबूतों के आधार पर एसीबी ने चौबे और उनके करीबियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच के लिए प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे 6 जून को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी थी। शुरुआती जांच के दौरान एसीबी को जानकारी मिली है कि उनके करीबियों के नाम पर पांच अचल संपत्तियां हैं। जांच के दौरान संपत्ति में निवेश और कुछ लोगों के बीच लेन-देन होने की जानकारी भी एसीबी को मिली है। एसीबी ने केस दर्ज करने की सरकार से मांगी अनुमति
दोनों मामलों की जांच एसीबी कर ही रहा था कि एक तीसरा मामला हजारीबाग स्थित खासमहाल की 2.75 एकड़ जमीन का सामने आ गया है। अब इस मामले में भी एसीबी ने विनय चौबे के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति राज्य सरकार से मांगी है। अगर सरकार से प्राथमिकी चलाने की अनुमति मिल जाती है को विनय चौबे की मुश्किलें काफी बढ़ जाएगी। क्योंकि वे पहले आईएएस अधिकारी होंगे, जिन पर तीन-तीन मामलों की जांच एसीबी कर रहा है।


