झारखंड हाई कोर्ट ने सोमवार को ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को रात 10 बजे के बाद ध्वनि प्रदूषण रोकने के पूर्ववर्ती आदेशों के अनुपालन के लिए स्पष्ट कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया। सरकार को अगली सुनवाई में यह योजना प्रस्तुत करनी होगी। कोर्ट ने गृह सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए व्यक्तिगत रूप से जवाब दाखिल करने को कहा। साथ ही, सभी जिलों में हाईकोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि पर्व-त्योहारों व अन्य आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण संबंधी आदेशों की अनदेखी हो रही है, यह चिंता का विषय है। नियमों का खुला उल्लंघन सिविल सोसायटी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि ध्वनि प्रदूषण (नियंत्रण और नियंत्रण) अधिनियम, 2000 के मानकों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में तय सीमा से अधिक ध्वनि उत्पन्न हो रही है, पर सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।


