भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा स्कूल शुरू होते ही ग्रामीणों की फिर से 40 से 50 किमी की दौड़ शुरू हो गई है। स्कूलों में बन रही अपार आईडी के चक्कर में अब ग्रामीण सुबह से शाम तक च्वाइस सेंटरों में बने हुए हैं। जिले के कुआकोंडा, कटेकल्याण ब्लॉक के दूरदराज के गांव के लोगों को रोजाना इसे लेकर परेशान होना पड़ रहा है। सोमवार को पालनार में बड़ी संख्या में ग्रामीण आधार में जानकारी सुधरवाने पहुंचे, जिन्होंने बताया कि किसी आधार कार्ड में पालक का नाम गलत है तो किसी में बच्चे के स्कूल से इसे ठीक करवाने कहा गया है। ग्रामीणों ने बताया गांव में फोटोकॉपी तक की व्यवस्था नही है। ऐसे में बैलाडीला, पालनार, दंतेवाड़ा, कुआकोंडा तक जाना पड़ रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी एसके अंबष्ठ ने बताया लगभग 42 हजार अपार आईडी जिले में बनाई जानी हैं। आधार में गड़बड़ी के कारण इसमें देरी हो रही है। बावजूद 30 हजार के करीब अपार आईडी जनरेट हो चुकी है। जैसे-जैसे आधार कार्ड में सुधार होता चला जा रहा है, अपार आईडी बनाई जा रही है। अपार आईडी से छात्रों के स्कोरकार्ड, मार्कशीट, डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां शामिल हैं। इससे विद्यार्थी विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में आसानी से स्थानांतरित करने में मदद मिलती है। छात्रों को एक स्कूल से दूसरे स्कूल में जाने पर अपने रिकॉर्ड जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। जानिए, क्या है अपार आईडी आधार कार्ड सुधरवाने पहुंचे ग्रामीणों ने बताया उन्हें अपार आईडी के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन आधार कार्ड में सुधार करने कहा गया है। अपार आईडी, जिसे ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री कहा जाता है, छात्रों के लिए एक 12 अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर है, जिससे छात्र के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डििजटल रूप से संग्रहित करने, प्रबंधित करने और एक्सेस करने की सुविधा मिलती है। यह वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी पहल का ही अपार एक हिस्सा है। छात्रों के लिए एक डिजीटल पहचान है, जो उनके शैक्षणिक इतिहास को एक ही स्थान पर संग्रहित करती है।


