भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले के फूलपाड़ में आर्सेलर मित्तल कंपनी की जमीन को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। राजस्व विभाग के मुताबिक फूलपाड़ और पालनार ग्राम पंचायत की सीमा पर 2008 में किसान चमरा, गोकुल, मोकुल ने 132 हेक्टेयर जमीन आर्सेलर मित्तल कंपनी को बेच दी थी, जिसकी एवज में उन्होंने पैसे भी लिए और रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी पूरी की गई। इसके सारे दस्तावेज कंपनी के पास होने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन अब इस जमीन को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। फूलपाड़ के ग्रामीणों और जमीन मालिक भी जमीन धोखे में रखकर रजिस्ट्री करवाने का आरोप लगा रहें हैं। हालांकि चमरा, जिसने जमीन बेचने में अहम भूमिका निभाई थी, वह सामने नहीं आया, लेकिन गोकुल ने बताया कि जब जमीन की रजिस्ट्री हुई, तब उसे इसकी जानकारी नहीं थी। इस जमीन पर सागौन पेड़ों के बेचने की बात कहकर लिखा-पढ़ी करवाने की बात गोकुल ने कही है। ग्रामीणों ने तहसीलदार से सीमांकन की प्रक्रिया को रोकने की मांग की । 17 साल पहले हुई थी रजिस्ट्री, उस समय नहीं किया विरोध तहसीलदार महेश कश्यप ने बताया कि जमीन की रजिस्ट्री 17 साल पहले हुई है। उस समय किसी ने भी विरोध नहीं किया। जिस जमीन पर ग्रामीण अपना कब्जा बता रहे हैं, उसके कोई दस्तावेज उनके पास नहीं हैं। ग्रामीणों ने बताया कि खसरा नंबर 47/2, 133, 134, 142/1, 42/3, 143, 144/2, 144/3 की रजिस्ट्री धोखे से की गई है। जमीन मालिकों ने इस जमीन पर लगे सागौन के पेड़ बेचे थे, जबकि उन्हें गुमराह कर जमीन की रजिस्ट्री करवा ली गई। सीमांकन करने पहुंची टीम को 42 किसानों ने बताया इस जमीन पर उनका कब्जा है और से कई सालों से यहां खेती करते आ रहे हैं। सागौन पेड़ों के नाम पर जमीन की दलाली बली नागवंशी ने की थी। किसानों को गुमराह किया जा रहा है।


