वारिस मलिक| जालंधर आज 1 जुलाई है। जालंधर के प्रशासनिक इतिहास में सबसे अहम दिन। जब देश की आजादी का संघर्ष निर्णायक दौर में था तो 1 जुलाई 1947 को सुरिंदर दास मिड्ढा जालंधर के डिप्टी कमिश्नर तैनात किए गए थे। वे इकलौते पीसीएस अधिकारी थे, जिन्होंने पहले अंग्रेजों के शासन में जालंधर में काम किया और फिर बाद में 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के बाद जालंधर को संभाला। यह वह दौर था, जिसमें पाकिस्तान से रोजाना बड़ी संख्या में लोग पलायन करके जालंधर पहुंच रहे थे। अब तक जालंधर को 181 डीसी मिल चुके हैं। जालंधर के प्रशासनिक इतिहास की सोमवार को डीसी कॉम्पलेक्स में चर्चा रही। प्रथम एंगलो-सिख युद्ध 1845-46 की समाप्ति पर अंग्रेजों द्वारा दोआबा पर कब्जा करने पर जालंधर जिला बनाया गया था। तब एच वैनसिटार्ट अधिकारी के रूप में जालंधर को पहला प्रशासक मिला था, जो 1846-1847 तक जालंधर में रहे। इसके बाद मिस्टर स्कॉट 1847-1848, एच ब्रेरेटन 1849-1851, मेजर एच एडवर्ड 1852-1852, कैप्टन एमसी लेओड फ़ारिंगटन 1853-1858, कैप्टन एन एलफिंस्टन 1860-1863, जीआर एल्स्मी 1864-1869, एफई मोर 1869-1869, एलएस सॉन्डर्स 1870-1871 अंग्रेजों के प्रशासक रहे।


