केंद्रीय संसदीय समिति की बैठक:कोयला, खान, रक्षा मंत्रालय व इसरो से एचईसी को मिलेगा वर्क ऑर्डर, सरकार को जमीन बेचकर फंड जुटाने पर भी जोर

एचईसी के पुनरुद्धार के लिए मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय संसदीय समिति की बैठक हुई। इसमें पहली बार एचईसी मजदूर यूनियन के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था। बैठक में कहा गया कि आर्थिक मदद देकर इसका पुनरुद्धार किया जाएगा। बैठक में एचईसी के मशीनों के आधुनिकीकरण और कामगारों को नियमित वेतन देने पर चर्चा हुई। प्रबंधन के मुताबिक बैठक में एचईसी के पुनरुद्धार के लिए नेटवर्थ और बैंक लोन पर बात हुई। इसके लिए सोवरेन गारंटी पर शीघ्र विचार किया जाएगा। समिति ने एचईसी के ब्याज का बोझ कम करने पर भी जोर दिया। बैठक में कहा गया कि एचईसी के पास जो जमीन है, उसे राज्य सरकार को देकर फंड जुटाया जाएगा। बैठक में मौजूद इस्पात, कोयला और खान मंत्रालय, डीआरडीओ और इसरो के प्रतिनिधियों से एचईसी को वर्क ऑर्डर देकर मदद करने की अपील की गई, जिस पर उन्होंने हामी भरी। राज्यसभा सांसद तिरुचि शिवा की अध्यक्षता में हुई बैठक में एचईसी के सभी डायरेक्टर, सीएमडी, 10 से ज्यादा सांसद, भारी उद्योग मंत्रालय के प्रधान सचिव कामरान रिजवी और संयुक्त सचिव विजय मित्तल शामिल थे। बैठक में एचईसी प्रभारी सीएमडी केएस मूर्ति, निदेशक विपणन आलोक सिंघल, निदेशक उत्पादन बीएस गर्ग, निदेशक कार्मिक मनोज कुमार लकड़ा, निदेशक वित्त मुकेश कुमार के अलावा एचईसी मजदूर यूनियनों के प्रतिनिधि रमाशंकर प्रसाद, प्रकाश कुमार, एसजे मुखर्जी, आर के शाही, पूर्णेन्दु मिश्रा, सनि सिंह, विमल महली, हरेंद्र प्रसाद व दिलीप सिंह मौजूद थे। गौरतलब है कि एचईसी का पहले तीन बार पुनरुद्धार हो चुका है। लेकिन यह एक बार फिर संकट में आ गया है। इस समय एचईसी की देनदारी 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा है। ये पीएफ, बिजली, बीमा, ईएसआई और रॉ मैटीरियल आदि के हैं। बैंक लोन 288 करोड़ रुपए का है। इस पर तीन करोड़ रुपए का ब्याज देना पड़ता है। एचईसी कर्मचारियों का भी 25 महीने का वेतन बकाया है। इधर, संसदीय समिति की बैठक से पहले सीएमडी ने यूनियन प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की थी। इसमें तय हुआ था कि 50 सुरक्षाकर्मियों की भर्ती कर एचईसी टाउनशिप की दुकानों से किराया वसूला जाएगा। अवैध निर्माण को रोका जाएगा। दिल्ली में हुई बैठक में इन पर भी हुई चर्चा – जैसा यूनियन के प्रतिनिधियों ने बताया

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