जंगल में आदिवासियों और वनवासियों की सामुदायिक जमीन पर सामाजिक संस्थाओं के हस्तक्षेप को लेकर नया बखेड़ा खड़ा हो गया है। राज्य के कई इलाकों में वन वासियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक जमीन के मैनेजमेंट का अधिकार मिला है, उन पर सामाजिक संस्थाओं ने अपनी गतिविधियां शुरू कर दी थीं। वे उन जमीनों पर वन वासियों को रोजगार और शिक्षा देने का हवाला देकर उनका मैनेजमेंट अपने हाथ में लेना चाह रही थी। वन विभाग ने इस पर बैन लगाया तो संस्थाएं विरोध में खड़ी हो गईं। हालात को देखते हुए वन विभाग ने अपने बैन वाले आदेश को निरस्त किया लेकिन इस बारे में केंद्रीय आदिम जाति और वन विभाग से दिशा निर्देश मांगा है। अब केंद्र से निर्देश मिलने के बाद ही वन वासियों की सामुदायिक जमीनों के मैनेजमेंट और उनके उपयोग का निर्णय लिया जाएगा। जंगलों में 2005 से पहले रहने वाले आदिवासियों और वन वासियों को केंद्रीय ट्रायबल अधिनियम के तहत वन अधिकार पट्टा दिया गया है। इसके तहत जो आदिवासी या वन वासी जिस जगह पर रहते हैं, उन्हें उसका मालिकाना हक दिया गया। इसी तरह जंगल में करीब 4 हजार से ज्यादा ऐसी जगह हैं जिनका सामुदायिक उपयोग हो रहा है। बरसों से वहां का मैनेजमेंट वनवासी कर रहे हैं। इस वजह से केंद्रीय अधिनियम में उस जगह पर वनवासियों को सामुदायिक अधिकार दिया गया है। अभी तक उस जमीन का कई तरह से वन वासी उपयोग कर रहे हैं। इस बीच कुछ सामाजिक संस्थाओं ने आदिवासियों के हितों का हवाला देकर उस जमीन का मैनेजेमेंट अपने हाथ में लेने का प्रयास किया था। वर्किंग प्लान के प्रोजेक्ट भी फंस रहे थे वन विभाग में हर 10 साल में जंगल और उसकी जमीनों को लेकर वर्किंग प्लान बनाया जाता है। इसमें वन वासियों की सामुदायिक जमीन का भी प्लान शामिल रहता है। क्योंकि केंद्रीय ट्रायबल अधिनियम में सामुदायिक उपयोग की जमीन को भी वर्किंग प्लान में शामिल करने के निर्देश हैं। इस वजह से कभी उसमें पौधारोपण तो कभी सुरक्षा घेरे का प्रोजेक्ट रहता है। एक ओर सामुदायिक जमीन वन वासियों के अधिकार में दी गई है दूसरी ओर वन विभाग के वर्किंग प्लान में भी शामिल कर लिया गया है। इस वजह से प्रोजेक्ट अमल में लाने के दौरान जंगल में वन वासियों और अफसरों के बीच विवाद की स्थिति पैदा होती थी। एक नजर में आदेश निरस्त पर अब केंद्र के निर्देश पर होगा निर्णय
सामाजिक संस्थाओं पर बैन वाले आदेश को निरस्त कर दिया गया है। फिलहाल हम इंतजार कर रहे हैं केंद्रीय ट्रायबल विभाग के निर्देश का।उनका निर्देश मिलेगा, उसी के अनुसार आगे निर्णय लिया जाएगा।
श्रीनिवास राव, पीसीसीएफ छत्तीसगढ़


