जिले के मोपका, भरनी, करगीकला और बिल्हा स्थित धान संग्रहण केंद्रों में करीब 7 करोड़ 27 लाख रुपए मूल्य का धान 7 महीने से अधिक समय से जाम है। उठाव न होने और बारिश से बचाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण धान की गुणवत्ता द मात्रा दोनों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह धान को सड़ाने की कोई सोची समझी साजिश तो नहीं। संग्रहण केंद्रों में धान को बारिश से बचाने के लिए चबूतरों की व्यवस्था न होने के कारण स्थिति और भी गंभीर हो गई है। दैनिक भास्कर की टीम ने मंगलवार शाम 4 बजे के बाद भरनी संग्रहण केंद्र का दौरा किया, जहां धान के ढेर फटे तिरपालों से ढके हुए मिले, जिससे धान भीग रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्र में एक भी चबूतरा नहीं है, सिर्फ नाममात्र के लिए जमीन पर भूसा बिछाया गया है। संग्रहण केंद्र के कर्मचारियों ने बताया कि बारिश से धान को बचाने के लिए तिरपाल ढका गया था, लेकिन आंधी-तूफान और धान ढोने वाले ट्रकों के धक्के से तिरपाल फट गए हैं। मोपका सहित करगीकला और बिल्हा के संग्रहण केंद्रों का भी यही हाल है, और फटे तिरपालों को बदला नहीं गया है। वर्तमान में भरनी संग्रहण केंद्र में ही कुल 39,421 मीट्रिक टन धान में से 17,929 मीट्रिक टन का उठाव होना बाकी है। इसके अलावा मोपका, भरनी, करगीकला और बिल्हा संग्रहण केंद्र में कुल 1,36,629 मीट्रिक टन धान डंप किया गया था। जिसमें से अब तक 74,477 मीट्रिक टन का ही उठाव हो पाया है। बगैर ढका धान इस तरह बारिश में भीग रहा। इनसेट: भीगने की वजह से धान के बीज अंकुरित भी होने लगे हैं। मिलर्स गिनती के ट्रक भेज रहे
संग्रहण केंद्रों से धान के उठाव की गति बेहद धीमी है। मिलर्स कम ट्रक भेज रहे हैं। इस धीमी गति के कारण धान को उठाने में कम से कम एक महीने का और समय लगने का अनुमान है। यदि इस दौरान तेज बारिश होती है, तो यह धान पूरी तरह से सड़ सकता है। जिला सहकारी बैंक के एक अधिकारी के अनुसार, इस बार किसानों से 20 की जगह 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा गया था। उठाव में लग सकता है एक महीना
संग्रहण केंद्रों में रखे धान का उठाव चल रहा है। जो धान शेष है, उसको उठाने में कम से कम एक महीने का समय और लगेगा। धान सड़ाने जैसी किसी प्रकार की साजिश नहीं की जा रही है।
शंभू कुमार गुप्ता ,जिला विपणन अधिकारी


