भास्कर न्यूज | जालंधर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति अपनी अटल प्रतिबद्धता के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाई। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को चिह्नित करने के लिए, पीपीसीबी ने चमड़ा और प्लाईवुड उद्योगों के साथ एक विशेष संवाद सत्र के साथ स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में चमड़ा और प्लाईवुड उद्योगों के प्रमुख विशेषज्ञों और शैक्षणिक पेशेवरों ने भाग लिया, जिन्होंने सतत प्रथाओं, नवाचारों और साझा विकास पर अपने विचार साझा किए। इस सत्र का उद्देश्य सहयोग को मजबूत करना और पर्यावरण संरक्षण के साथ औद्योगिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करना था। जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 ने पंजाब सरकार को बोर्ड के गठन का निर्देश दिया, जिसके परिणामस्वरूप 1975 में बोर्ड की स्थापना हुई। मुख्य पर्यावरण इंजीनियर डॉ. करुणेश गर्ग ने समारोह को संबोधित करते हुए बोर्ड की उपलब्धियों के बारे में बताया। जिसमें ऑनलाइन सहमति प्रबंधन और निगरानी प्रणाली का विकास शामिल है, जिसे पंजाब ने देश के पहले राज्य के रूप में लागू किया। उन्होंने पिछले 50 वर्षों में बोर्ड की प्रगति पर प्रकाश डाला। पीपीसीबी ने सेंट्रल लेदर रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुख्य वैज्ञानिक सुधाकर पी को आमंत्रित किया। जिन्होंने चमड़ा प्रसंस्करण में स्वच्छ तकनीकों और कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूकता फैलाई। प्रोफेसर एनआईटी डॉ. रोहित मेहरा ने चमड़ा उद्योग और पर्यावरणीय प्रभावों पर व्याख्यान दिया। सीईओ हीरा लाल ने जालंधर के लेदर कॉम्प्लेक्स के इतिहास और चुनौतियों के बारे में बताया। प्रिंसिपल वैज्ञानिक अधिकारी, पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी चंडीगढ़ रणजीत सिंह ने प्लाईवुड उद्योगों के लिए प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों पर जानकारी साझा की। चेयरमैन ऑल इंडिया प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन नरेश तिवारी ने समय-समय पर पीपीसीबी को प्लाईवुड उद्योगों में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करने में सहायता प्रदान की। वरिष्ठ पर्यावरण इंजीनियर विजय कुमार, दीपक चावला, परवीन कुमार, संजय कुमार, और लेदर कॉम्प्लेक्स जालंधर की कार्य समिति के सभी सदस्य समारोह में शामिल हुए। 50 वर्ष पूरे होने पर अधिकारियों को सम्मानित करते हुए करुणेश गर्ग और उपस्थित पीपीसीबी अधिकारी।


