अमृतसर | अमृतसर के केंद्रीय अनाथालय में छठी कक्षा में पढ़ने वाले हरनूर को मूत्र मार्ग में गंभीर बीमारी थी। उसके माता-पिता नहीं हैं। 75 वर्षीय दादा भी लाचार हैं। इलाज का खर्च डेढ़ से दो लाख रुपए बताया गया। परिवार के पास पैसे नहीं थे। दुख निवारण अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर हरजिंदर सिंह गोराया को जब यह जानकारी मिली तो उन्होंने बच्चे का मुफ्त इलाज कराने का फैसला किया। बच्चे को 20 दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा गया। प्लास्टिक सर्जरी की मदद से इलाज किया गया। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। गोराया ने कहा कि अस्पताल में रोज मरीज आते हैं और ठीक होकर जाते हैं, लेकिन इस बच्चे के इलाज से उन्हें अलग ही संतोष मिला है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय अनाथालय जैसी संस्थाएं समाज के लिए जरूरी हैं। हमें इनके साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। गोराया ने इलाज में सहयोग देने वाले डॉक्टरों का आभार जताया। इनमें डॉ. जीपी सिंह (न्यूरो सर्जन), डॉ. संजय कपूर (ईएनटी स्पेशलिस्ट), डॉ. विनोद कौशल (एसडी मेडिसिन), डॉ. तजिंदर सिंह (एनेस्थीसिया), डॉ. आरएस बोपाराय और सुमित अग्रवाल (पीडियाट्रिक सर्जन) शामिल हैं।


