लोहा कारोबारी विक्की समेत 4 के खिलाफ आरोप-पत्र दायर

ईडी ने 730 करोड़ रुपए के जीएसटी घोटाले मेंं आरोपी जुगसलाई के लोहा कारोबारी विक्की भालोटिया उर्फ अमित अग्रवाल, कोलकाता के व्यापारी शिव कुमार देवड़ा, उनके पुत्र मोहित देवड़ा आैर कोलकाता के व्यापारी अमित गुप्ता के खिलाफ पीएमएलए कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल किया। इन लोगों पर 135 शेल कंपनियां बनाकर 5000 करोड़ रुपए का फर्जी व्यापार दिखा कर 730 करोड़ रुपए का जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। ईडी ने आठ मई 2025 को जीएसटी घोटाले से जुड़े कारोबारियों के जमशेदपुर, कोलकाता व रांची के ठिकानों पर छापामारी की थी। छापामारी के क्रम में ईडी ने जुगसलाई के लोहा व्यापारी अमित अग्रवाल उर्फ विक्की भालोटिया, कोलकाता से शिवकुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा और अमित गुप्ता को गिरफ्तार किया था। ईडी ने जांच में पाया कि घाटोला के आरोपियों ने बिना व्यापार के ही जीएसटी का फर्जी बिल अपनी शेल कंपनियों के नाम पर जारी किया और जीएसटी के तहत आईटीसी का गलत लाभ लिया। आरोपियों ने फर्जी निदेशक भी बना रखा था। कुछ कंपनियों में आरोपी खुद निदेशक थे। शेल कंपनियों का नियंत्रण भी आरोपियों के पास ही था। गौरतलब है कि ईडी ने 8 मई 2025 को विक्की भालोटिया, शिव कुमार देवडा, मोहत देवड़ा आैर अमित गुप्ता घोटाले के सभी आरोपियों के ठिकानों पर छापामारी की थी। सभी आरोपी वर्तमान में होटवार जेल में कैद है। विक्की भालोटिया, अमित गुप्ता व अन्य की जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। जबकि शिवकुमार देवडा ने अब जमानत के लिए ईडी की पीएमएलए कोर्ट में जमानत पर 15 जुलाई को सुनवाई होगी। पारसनाथ पर्वत पर अधिकार को लेकर स्पष्ट रिपोर्ट बने : मंत्री पारसनाथ पर्वत पर आदिवासियों के अधिकार को लेकर मरांगबुरू संस्थान ने गिरिडीह उपायुक्त के समक्ष विस्तृत तथ्यों को रखा है। इस बाबत शनिवार को भौतिक जांच व रिपोर्ट तैयार करने को लेकर समाहरणालय सभागार में बैठक भी हुई। बैठक की अध्यक्षता राज्य के पर्यटन मंत्री सह स्थानीय विधायक सुदिव्य कुमार ने की। बैठक में मारंगबुरू संस्थान के सदस्यों ने बताया कि संथाल आदिवासी पारसनाथ पर्वत को मरांग बुरू के नाम से पूजते हैं। यह नाम पौराणिक काल से प्रचलित है। बिहार जिला गजट 1957 में इसका उल्लेख है। मंत्री सुदिव्य ने कहा कि पारसनाथ में अतिक्रमणकारी कौन है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। जो सच है, उसी के अनुसार रिपोर्ट बननी चाहिए। संथाल आदिवासियों के धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रथागत अधिकार वैधानिक रूप से मान्य हैं।

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