भास्कर न्यूज | कवर्धा जन स्वास्थ्य अभियान-इंडिया ने 1 से 3 जुलाई तक भोपाल में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की। इसमें देश के 10 राज्यों से आए 40 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे बुद्धिजीवी, जमीनी कार्यकर्ता, नेटवर्क और नागरिक संगठनों के साथी शामिल रहे। कार्यशाला का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और समान जनस्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और सार्वभौमीकरण पर चर्चा करना था। छत्तीसगढ़ से राज्य समन्वयक चंद्रकांत यादव के नेतृत्व में एक सक्रिय दल ने भाग लिया। इस दल में कबीरधाम से ज्योति साहू, जांजगीर-चांपा से चंद्रकुमारी लहरे, अंबागढ़ चौकी-मोहला-मानपुर से सुखदास मंडावी, रायपुर से चुन्नी और सोमा, कोरिया से मंती सिंह शामिल रहीं। इन सभी ने छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने अनुभव साझा किए। इनके विचारों से राष्ट्रीय स्तर की चर्चा को नई दिशा मिली। नीति की खामियों को किया उजागर: कार्यशाला में कोविड-19 महामारी के दौरान सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियों और निजी क्षेत्र की मुनाफाखोरी ने इन नीतियों की खामियों को उजागर कर दिया। कार्यशाला में कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें सार्वजनिक अस्पतालों और सेवाओं के निजीकरण जैसे मुद्दे शामिल रहे। नीति निर्माण में स्वास्थ्य अधिकार को प्राथमिकता देने की रखी मांग प्रतिनिधियों ने 21 जुलाई 2025 से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को ध्यान में रखते हुए मांग रखी कि किसी भी नीति निर्माण में आम जनता के स्वास्थ्य अधिकार को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने मौजूदा कॉर्पोरेट-प्रेरित स्वास्थ्य नीतियों पर चिंता जताई। कहा कि ये नीतियां आम लोगों की सेहत के प्रति असंवेदनशील हैं। राष्ट्रीय सम्मेलन करने का निर्णय जन स्वास्थ्य अभियान-इंडिया ने वर्ष के अंत में राष्ट्रीय सम्मेलन और उससे पहले 10 राज्यों में क्षेत्रीय सम्मेलन व राज्य स्तरीय कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्णय लिया। छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों की भागीदारी ने इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।


