1 और नए तीर्थ पर पहुंची ASI की टीम:भद्रिका तीर्थ का कर रही सर्वे, फोटो और वीडियोग्राफी की जा रही

संभल में गुरुवार को एक ओर तीर्थ स्थल पर ASI की टीम पहुंची है। संभल के प्राचीन भद्रिका तीर्थ पर ASI की टीम जांच कर रही है। टीम के साथ में SDM वंदना मिश्रा भी पहुंची हैं। ASI की टीम फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कर रही है। संभल के हौज भदेसराय में भद्रिका तीर्थ स्थित है। बता दें, संभल में 19 मृत कूपों की खुदाई का काम गुरुवार सुबह से ही शुरू हो गया है। यह मोहल्ला कोट पूर्वी के सरथल चौकी के पास स्थित है। इसके अलावा पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी और रानी सुरेंद्रबाला की बावड़ी की खुदाई का काम गुरुवार को छठे दिन भी जारी रहा। हालांकि खुदाई के दौरान पुरातत्व विरासतों को क्षति न पहुंचे, इसलिए जेसीबी के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। गुरुवार को 50 मजदूर बावड़ी के अंदर खुदाई का काम कर रहे हैं। संभल में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी, फिरोजपुर किला और क्षेमनाथ मंदिर का ASI ने निरीक्षण किया। डीएम-एसपी मौजूद रहें, वहीं तोता-मैना की कब्र को भी देखा है। डीएम ने सभी प्राचीन इमारत एवं 68 तीर्थ 19 कूपों को संरक्षित करने का आश्वासन दिया है, वहीं उन्होंने किसी भी प्राचीन इमारत या धार्मिक स्थल पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। लाल पत्थर की फर्श और कई झरोखे मिले बता दें कि बुधवार को बावड़ी की खुदाई के दौरान आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की टीम को लाल रंग के पत्थरों की एक फर्श मिली है। इसके अलावा दीवारों पर झरोखेनुमा आकृतियां भी मिली हैं। ASI की टीम ने इनकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की है। पहले देखें खुदाई से जुड़ी तस्वीरें… अब आइए विस्तार से जानते हैं पूरा मामला… जनपद संभल की कोतवाली चंदौसी क्षेत्र के मौहल्ला लक्ष्मणगंज में वर्ष 1857 की रियासत की रानी सुरेंद्रबाला की बावड़ी मिली है। संपूर्ण समाधान दिवस में इस पर अवैध कब्जा होने की शिकायत के बाद नगर पालिका परिषद चंदौसी की जेसीबी और मजदूर लगातार खुदाई कर रहे हैं। हालांकि खुदाई के दौरान पुरातत्व विरासतों की सुरक्षा को देखते हुए जेसीबी के उपयोग को रोक दिया गया है। अब सिर्फ मजदूरों की मदद से खुदाई का काम कराया जा रहा है। ASI के साथ DM-SP ने भी किया निरीक्षण बुधवार को ASI की टीम के साथ संभल के डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया, एसपी कृष्ण विश्नोई और एसडीएम वंदना मिश्रा ने सम्राट पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी को देखा। इसके साथ ही फिरोजपुर किला, क्षेमनाथ मंदिर और तोता-मैना की कब्र का भी निरीक्षण किया। डीएम ने सभी प्राचीन इमारत एवं 68 तीर्थ 19 कूपों को संरक्षित करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने किसी भी प्राचीन इमारत या धार्मिक स्थल पर अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की बात कही है। इस दौरान एसडीएम वंदना मिश्रा भी मौजूद रहीं। अब तक 12 मीटर खोदी जा चुकी सुरंग बता दें कि बीत पांच दिनों से संभल के रानी सुरेंद्रबाला की बावड़ी में खुदाई का काम जारी है। बावड़ी की खुदाई करते-करते आठ सीढ़ियां हाथ आ गई हैं, सड़क से 6 से 7 फीट गहरी खुदाई की जा चुकी है और बावड़ी की सुरंग की खुदाई 12 मीटर लंबी हो चुकी है। अभी दो मंजिल की खुदाई बाकी आपको बता दें की रानी सुरेंद्र बाला की बावड़ी तीन मंजिल की है। जिसमें से अभी एक मंजिल ही पूरी तरह से सामने आ पाई है। इस ऊपरी मंजिल पर लाल पत्थरों की फर्श मिली है। जिला प्रशासन की मानें तो दो मंजिल अभी भी नीचे दबी है। जिन्हें सामने लाने के लिए तेजी से खुदाई का काम किया जा रहा है। डीएम बोले- इतिहास को संजोएंगे तो इतिहास आपको भूल जाएगा निरीक्षण के दौरान डीएम ने कहा कि संभल में बना सम्राट पृथ्वीराज चौहान का किला 11वीं शताब्दी के दौरान बना था। पर इसका समय के साथ संरक्षण नहीं किया गया और यह विलुप्तप्राय हो गया। उन्होंने कहा कि एएसआई के पास इसके संरक्षण के लिए पहले ही रिपोर्ट आ गई थी, पर संभल में कार्यरत कर्मचारी ने इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी ही नहीं। अन्यथा पहले ही इसके संरक्षण की कवायद शुरू कर दी गई होती। डीएम ने कहा कि संभल पौराणिक शहर है। यहां कई धरोहरे हैं, जिनका संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर आप इतिहास को नहीं संजोएंगे तो इतिहास आपको ही भूल जाएगा। डीएम ने कहा कि संभल के 19 कूपों और 68 पुरातन इमारतों समेत सभी प्राचीन भवनों का संरक्षण किया जाएगा और इसके लिए धार्मिक-पर्यटन रोड मैप बनाया जाएगा। ताकि लोगों का ध्यान संभल की ओर आकर्षित हो। ——————————————– ये भी पढ़ें… संभल में ASI ने पृथ्वीराज चौहान के किले को देखा:150 साल पुरानी बावड़ी का पहला फ्लोर सामने आया; लालरंग की फर्श मिली संभल में प्रशासन को दो जगहों पर पृथ्वीराज चौहान की विरासतें मिली हैं। पहली विरासत विशाल बावड़ी है, जहां पृथ्वीराज चौहान अपने सैनिकों के साथ पड़ाव डालते थे। दूसरी विरासत फिरोजपुर गांव में एक किला है, जो खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस पर पुरातत्व विभाग का बोर्ड लगा है, लेकिन देखरेख नहीं होने से लुप्तप्राय स्थिति में है। डीएम डॉक्टर राजेंद्र पेंसिया, एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसडीएम वंदना मिश्रा और पुरातत्व विभाग की टीम ने बुधवार शाम 4 बजे बावड़ी, फिरोजपुर किला और क्षेमनाथ मंदिर का ASI ने निरीक्षण किया। लोगों ने बावड़ी के अंदर जाकर, दीवारों को छूकर पूरा निरीक्षण किया।

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