विशेष संवाददाता |रांची श्री हरि ने इंद्र को देवलोक पर अधिकार और राजा बली के घमंड को खत्म करने के लिए वामन अवतार लिया। सतयुग में जगत के पालनहार कहे जाने वाले भगवान विष्णु ने पांचवें अवतार के रूप में वामन का अवतार लिया। व्यास पीठ पर विराजमान प्रख्यात कथा वाचक रीवा के धर्माचार्य रामकुमार शुक्ल ने श्रीमद् भागवत कथा महापुराण के चौथे दिन गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार, सूर्यवंश और चंद्र वंश प्रसंग के दौरान भगवान राम और श्रीकृष्ण के जन्म पर कथा कही। उन्होंने कहा कि भगवान वामन ने ब्राह्मण का रूप धारण कर प्रहलाद के पुत्र बाली के पास पहुंचकर तीन पग भूमि की मांग की। वहीं, गुरु शुक्राचार्य ने राजा बली को तीन भाग भूमि देने के लिए मना किया, लेकिन राजाबली ने गुरु शुक्राचार्य की बात ना मानते हुए भगवान वामन को तीन पर भूमि देने का वचन दिया। इसके बाद भगवान वामन ने विशाल रूप धारण किया और पहले ही पद में पूरी पृथ्वी और दूसरे में देवलोक को नाप लिया। तीसरी पग के लिए उनके पास कोई भी भूमि नहीं बची तो राजाबली ने तीसरे पद के लिए भगवान वामन के समक्ष अपना सर कर दिया। राजाबली के इस परित्याग को देखकर भगवान वामन बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने बली को पाताल लोक देने के बारे में फैसला लिया। इस प्रकार से भगवान वामन ने देवी-देवताओं को देवलोक वापस दिलाया और बाली के दर से छुटकारा दिलाया। इस दौरान आकर्षक झांकियां के माध्यम से भगवान राम और भगवान कृष्ण की लीला का पौराणिक वर्णन किया। कृष्ण जन्म से लेकर कंस वध और द्वारका प्रस्थान तक प्रसंग की व्याख्या की। संगीतमय कथा के दौरान शिवम भारद्वाज, अमित तिवारी, मूलचंद शर्मा बृजवासी और शीतला तिवारी, सतवंत तिवारी ने वाद्य यंत्रों के साथ भजनों और धार्मिक गीतों की प्रस्तुति देकर मनमोहक बना दिया। कथा शुरू होने से पहले मुख्य यजमान और राजेंद्र प्रसाद सिंह और कौशल्या देवी ने पारंपरिक व्यास पीठ पर विराजित श्रीमद् भागवत की पूजा अर्चना की और आरती उतारी।


