दर्री मटिया एनीकट प्रभावितों की जमीन मिलेगी वापस

भास्कर न्यूज| राजनांदगांव दर्री मटिया एनीकट प्रभावित किसानों की जमीन अब वापस मिलेगी। प्रशासनिक लापरवाही के चलते न सिर्फ उक्त निर्माण ध्वस्त हुआ अपितु इस ध्वस्तीकरण प्रक्रिया में शासन को लगभग 20 करोड़ की आर्थिक क्षति हुई। वहीं क्षेत्र के 28 किसान बीते 3 वर्षों तक कृषि कार्य से वंचित हो गए। यह पूरा मामला है डोंगरगांव नगर के वार्ड 13 में स्थित दर्री-मटिया एनीकट का जिसे वर्ष 2015-16 में सरकार ने किसानों के सिंचाई, निस्तारी तथा भूजल स्रोतों को बढ़ाने के उद्देश्य से उक्त एनीकट का निर्माण कराया था। इसकी लागत करीब साढ़े पांच करोड़ की थी। उक्त एनीकट निर्माण के उपरांत लगभग 5 वर्षों तक अपने निर्धारित उद्देश्य को पूरा करता रहा। इससे क्षेत्र के किसान अपने कृषि भूमि पर रबी एवं खरीफ दोनों फसलों से उत्पादन लेकर अपना जीवन स्तर सुधार रहे थे। वहीं इस एनीकट का लाभ नगर निगम राजनांदगांव को पेयजल आपूर्ति के लिए भी मिल रहा था। साथ ही एनीकट से लगे ग्राम मटिया, दर्री, करियाटोला, बेंदरकट्टा, कोहका एवं नगरीय क्षेत्र डोंगरगांव के अनेक वार्डों में भूजल स्तर में वृद्धि हुई थी। वहीं बीते चार वर्ष पूर्व से उक्त एनीकट प्रशासनिक लापरवाही के चलते ध्वस्त हो गया था। जिसमें 28 किसानों की कृषि भूमि नदी में समाहित हो गई थी। इससे पेयजल आपूर्ति के लिए साढ़े 12 करोड़ की लागत से बने जल आवर्धन योजना पूर्ण से बंद हो चुकी थी। जिसे अब पुन: सरकार ने करोड़ों की लागत से उक्त विनाश को पुन: विकास में परिवर्तित किया है। शासन को 20 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। जिसमें साढ़े 5 करोड़ का एनीकट एवं 12 करोड़ की लागत से निर्मित जल आवर्धन योजना जैसे बड़ी परियोजना शामिल है। वहीं 28 किसानों की 15 से 18 एकड़ कृषि भूमि निर्माण कार्य के पूर्व तक कृषि योग्य नहीं हो पाई। उक्त कृषक फसल लेने से वंचित रहे। वहीं अब इसके पुनरूत्थान में सांसद संतोष पाण्डे की पहल पर लगभग 13 करोड़ की धनराशि वर्तमान सरकार द्वारा व्यय किया गया है। इसमें बाढ़ एवं कटाव रोधी 739 मीटर रेटेनिंग वॉल, 173 मीटर एनीकट के जेकेटिंग, पुनरुद्धार तथा 125 मीटर का नया बाढ़ रोधी पहुंच मार्ग सहित किसानों की नदी में समाहित हो चुकी कृषि भूमि को फिलिंग कर पुन: कृषि योग्य बनाया गया है। इन कार्यों से किसानों की जमीनें उन्हें वापस मिलेगी। सबसे बड़ा लाभ नगरवासियों को होगा। जिसमें ध्वस्त हो चुके जल आवर्धन योजना को पुन: प्रारंभ कर नगर की पेयजल समस्या को दूर किया जाएगा।

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