लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के महिला अध्ययन केंद्र में अब दो वर्षीय (चार सेमेस्टर) “एम.ए. इन वुमन एंड जेंडर स्टडीज” पाठ्यक्रम शुरू कर दिया गया है। यह छत्तीसगढ़ राज्य का पहला पूर्णकालिक स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम है। ये कोर्स विशेष रूप से महिलाओं और जेंडर से जुड़े मुद्दों के सैद्धांतिक अध्ययन, फील्ड वर्क और शोध को समर्पित है। इस पाठ्यक्रम की वार्षिक फीस ₹4000 निर्धारित की गई है। एम.ए. कोर्स का मुख्य उद्देश्य छात्रों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों, लैंगिक असमानता, महिला अधिकारों, संबंधित विधियों और सामाजिक न्याय के क्षेत्रों में गहन ज्ञान व व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। यह पाठ्यक्रम छात्रों को नीति निर्माण, वकालत, अनुसंधान, शिक्षा, मीडिया, गैर-सरकारी व सरकारी संस्थानों, महिला एवं बाल विकास, काउंसलिंग, कुटुंब न्यायालय, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, समाजसेवा और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में प्रभावी भूमिका निभाने हेतु सक्षम बनाता है। अन्य प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी उपलब्ध इससे पहले भी महिला अध्ययन केंद्र द्वारा “सर्टिफिकेट कोर्स इन वुमन लॉ एंड जेंडर जस्टिस” और यूनेस्को के सहयोग से संचालित “कम्युनिटी बेस्ड पार्टिसिपेटरी रिसर्च” जैसे प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों की फीस ₹2500 है, जो छात्रों को विशिष्ट क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर प्रदान करते हैं। प्रवेश प्रक्रिया शुरू, सीमित सीटें इन तीनों ही पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में कुल 20 सीटें उपलब्ध हैं। इच्छुक अभ्यर्थी इन महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए शीघ्र आवेदन कर सकते हैं और लैंगिक अध्ययन के क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं।


