तस्वीर रांची के चान्हो प्रखंड की है राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। इस वर्ष मनरेगा के तहत राज्यभर में 50 हजार एकड़ में 56 लाख फलदार व इमारती पौधे लगाए जाने थे। इसके लिए जून में पौधारोपण की योजना थी, ताकि जुलाई में मानसून की बारिश से पौधों को पर्याप्त पानी मिल सके। पर जुलाई में 8 दिन बीत जाने के बावजूद पौधों की आपूर्ति लाभुकों तक नहीं हो सकी है। पौधरोपण के लिए चिन्हित भूमि पर अक्टूबर 2024 से गड्ढे खोदने का काम पूरा कर लिया गया था। मई 2025 में पौधा आपूर्ति के लिए सभी जिलों में टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। इसके बावजूद जून में पौधे नहीं लगाए जा सके। मानसून की अच्छी शुरुआत के बाद अब गड्ढों में पानी भर गया है। लेकिन लाभुक अभी भी पौधों का इंतजार कर रहे हैं। इधर, झारखंड हार्टिकल्चर एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल ने कहा कि राज्यभर के आपूर्तिकर्ताओं का 151 करोड़ रुपए विभाग के पास बकाया है। जब तक बकाया नहीं मिलेगा, हम पौधों की आपूर्ति नहीं कर सकते। इस वर्ष जनवरी में कुछ राशि मिली थी, लेकिन वह बेहद कम थी। अब स्थिति ऐसी है कि बिना भुगतान के हम आगे आपूर्ति नहीं कर सकते। जानिए… क्या है बिरसा हरित ग्राम योजना सभी जिलों में मनरेगा के तहत फलदार पौधों जैसे आम, अमरूद, नींबू, बेर, कटहल, चीकू, नाशपाती, लीची और संतरा, तथा इमारती पौधों जैसे सागवान और शीशम के पौधे लगाए जाने हैं। प्रत्येक एकड़ में 112 पौधे लगाए जाएंगे। कुल 50 हजार एकड़ में 56 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। प्रत्येक जिले में औसतन 2000 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। केंद्र से 282 करोड़ मिला, जल्द होगा भुगतान, जुलाई में पौधरोपण पूरा होने की उम्मीद : मनरेगा आयुक्त जुलाई में पौधरोपण पूरा कर लेने का लक्ष्य है। पौधरोपण के लिए टेंडर हो चुका है। गड्ढे भी तैयार हैं। केंद्र सरकार ने 282 करोड़ रुपए का फंड रिलीज किया है। तकनीकी कारणों से आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान में देरी हुई है, लेकिन अब उनका भुगतान कर दिया जाएगा। लाभुकों को पौैधे मिल जाएंगे। -मृत्युंजय वर्णवाल, मनरेगा आयुक्त मानसून की बारिश से गड्ढों में भरा पानी


