छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) का बड़ा कारनामा सामने आया है। 20 साल से जाे कंपनी काबिज थी, उसे रातोंरात हटाकर दूसरे को 151 एकड़ की जमीन कौड़ियों के भाव में दे दी गई। मामला रायगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र पतरापाली और कोटमार का है। यहां 2005 में वीजा स्टील कंपनी को 151 एकड़ जमीन 99 साल की लीज पर दी गई थी। फरवरी 2024 में सीएसआईडीसी के तत्कालीन कार्यकारी संचालक अनिल श्रीवास्तव ने चुपके से बिना वीजा स्टील को बताए उनकी जमीन वीपीए मेटालिक्स को दे दी। मई 2025 में जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जनसुनवाई बुलवाई तो वीजा स्टील को जानकारी लगी और वे हाई कोर्ट चले गए। कोर्ट ने उन्हें स्टे दे दिया और जनसुनवाई रोक दी गई, क्योंकि बिना जानकारी दिए सीएसआईडीसी लीज निरस्त नहीं कर सकता है। स्टे के बावजूद वीपीए मेटालिक्स धड़ल्ले से निर्माण कार्य करने में जुटा हुआ है। कोयला-आयरन की वजह से होती गई देरी: वीजा स्टील कंपनी का कहना है कि 2008 में एमओयू हुआ था। शर्त थी आयरन और कोयले की व्यवस्था में छत्तीसगढ़ सरकार मदद करेगी, क्योंकि इनके बगैर स्टील प्लांट नहीं लग सकता है। एमओयू होने के बाद कंपनी ने जमीन की बाउंड्रीवाल करवाई। आसपास की 100 एकड़ से अधिक निजी जमीन भी खरीदी। प्रदूषण और जल संसाधन विभाग की अनुमति ली। लेकिन आयरन और कोयले की व्यवस्था न हो पाने के कारण इंडस्ट्री लगने में देरी होती गई। कंपनी पत्रों के माध्यम से लगातार सीएसआईडीसी को इसकी सूचना दे रही थी।
आवंटन निरस्त होते ही वीपीए का आया आवेदन
{29 जून 2022 को वीजा स्टील का आवंटन निरस्त कर दिया गया।
{5 जुलाई 2023 को जमीन के लिए वीपीए मेटालिक्स ने आवेदन किया कि पतरापाली एवं कोटमार में प्लांट डालने के लिए 66 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है।
{8 अगस्त को वीपीए ने एक बार फिर पत्र दिया।
{22 सितंबर 2023 को सीएसआईडीसी ने आधिपत्य प्राप्त कर लिया।
{10 नवंबर 2023 को पहला वीपीए मेटालिक्स के साथ सीएसआईडीसी का एग्रीमेंट हुआ।
{7 फरवरी 2024 को पहले एग्रीमेंट को बिना निरस्त किए रिवाइज एग्रीमेंट कर 99 साल की लीज पर वीपीए को जमीन दे दी गई। विभाग से पूछिए, मैं कुछ नहीं बोलूंगा: हरबिलास
वीपीए मेटालिक्स के डायरेक्टर हरबिलास अग्रवाल से जब बात की गई कि जमीन पर स्टे है तो आप कैसे निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने जबाव दिया कि विभाग से बात कीजिए, मैं इस मामले में कुछ नहीं बोलूंगा। इसके बाद उन्होंने फोन रख दिया। दैनिक भास्कर उनसे यह सवाल करना चाहता था …
{आप 200 करोड़ रुपए लगाने की बात कही है, क्या आपके पास इतनी नेटवर्थ है?
{वीपीए मेटालिक्स की कितनी नेटवर्थ है?
{जब जमीन पर कोर्ट का स्टे लगा है तो आप निर्माण कैसे करा रहे हैं?
{क्या आपको पहले से पता था कि वीजा स्टील की जमीन निरस्त की जा रही है?
{10 नवंबर के एग्रीमेंट में क्या कमी आ गई थी कि तीन महीने दोबारा करना पड़ा?
{बांके बिहारी और श्री रूपानाधाम इस्पात में आप कितने प्रतिशत के शेयर होल्डर हैं? आंख बंद कर अफसर ने पास किया प्रोजेक्ट सीएसआईडीसी में वीपीए मेटालिक्स ने आवेदन के साथ अपना एक प्रोजेक्ट भी सबमिट किया। इसमें प्रोजेक्ट 780 करोड़ का बताया गया, जिसमें 200 करोड़ कंपनी खुद निवेश करेगी। चौंकाने वाली बात ये है कि वीपीए मेटालिक्स के हरबिलास अग्रवाल ने इस कंपनी को जमीन लेने से पहले ही खोला। इसके साथ वे बांके बिहारी और श्री रूपानाधाम इस्पात में पार्टनर हैं। उन्होंने इन दो कंपनियों की बैलेंस शीट लगाई। हरबिलास की कुल नेटवर्थ निकाली जाए तो वह 20 करोड़ रुपए भी नहीं है। ऐसे में वे 200 करोड़ रुपए कहां से लाएंगे, अफसर ने इसे जांचे बगैर ही प्रोजेक्ट पास कर दिया। आदेश निकाला, लेकिन उसे भेजा ही नहीं
वीपीए मेटालिक्स को जमीन देने के लिए अनिल श्रीवास्तव ने नियमों को ताक पर रख दिया। उन्होंने वीजा स्टील की लीज निरस्त करने का आदेश जारी तो किया, लेकिन उसे डिस्पैच ही नहीं किया। जमीन का आधिपत्य आने के बाद उसका विज्ञापन जारी नहीं किया गया। जमीन भी पुराने रेट पर दे दी गई। वीपीए की जगह दो अलग कंपनियों की बैलेंस शीट पर ही प्रोजेक्ट को पास कर दिया गया।


