भास्कर न्यूज | बालोद गुरुवार को गायत्री शक्तिपीठ में गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। सुबह ये शाम तक यज्ञ व संस्कार का कार्यक्रम हुआ। वैदिक मंत्रोचार से पूरा माहौल भक्तिमय रहा। मुख्य अतिथि श्यामकली तिवारी ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। हर युग में गुरु पूजनीय रहे हैं। उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है। सच्चा गुरु वही होता है जो अपने ज्ञान और शिक्षा से शिष्य को ऊंचाई और भगवत प्रेम की ओर ले जाए। गुरु का कर्तव्य है कि वह शिष्य को सही मार्ग दिखाए, उसे ज्ञान प्रदान करे और उसे परमात्मा के प्रेम से परिचित कराए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना जरूरी होता है। गुरु आधा अधूरा नहीं होना चाहिए। जो स्वयं का भी सुधार नहीं कर सकता है, वह अपने शिष्य को कैसे तारेगा। इसलिए तौल परख कर ही सच्चा गुरु बनाए और सद् गुरु ही हमारा कल्याण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु नहीं तो जीवन शुरू नहीं। जैसे लोगों को बाहर के रोगों को ठीक करने के लिए कुशल चिकित्सक की जरूरत होती है वैसे ही मन के रोगों के समाधान के लिए एक सद्गुरु की आवश्यकता होती है। जीवन में गुरु होना चाहिए गुरूर नहीं। सच्चे गुरु की प्राप्ति करनी है तो अहंकार से रहित हो जाओ फिर गुरु की तलाश शुरू करो। गुरु अंधकार पूर्ण जीवन में प्रकाश भरने वाले होते हैं। पूर्ण श्रद्धा भाव से गुरु की सेवा की जाए उनके बताए मार्ग पर चला जाए तो जीवन में परेशानियों का स्थान ही नहीं रहेगा। गुरु और शिष्य की परंपरा नया जीवन देती है: हेमवती हेमवती सिहारे ने कहा कि गुरु और शिष्य की परंपरा नया जीवन देती है। इसमें संकल्प जरूरी होता है। गुरु-शिष्य परंपरा, जिसे भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है, न केवल शिक्षा प्रदान करती है बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाती है। इस परंपरा में, शिष्य गुरु के मार्गदर्शन में ज्ञान प्राप्त करता है और अपने जीवन को सफल बनाने का संकल्प लेता है। गुरु सदैव शिष्य के भले के लिए कार्य करता है। गुरु वचन से जो सुख मिलता है, उसका आभास संसार की दूसरी किसी वस्तु में नहीं होता। गुरु सदैव अपने शिष्य का भला चाहता है। भगवान को प्राप्त करने का माध्यम गुरु है। जिस पर निष्ठा और विश्वास कायम कर हम ईश्वर का साक्षात्कार कर सकते हैं। जीवन में अगर कुछ करने लायक है तो वह जरूरतमंद लोगों की सेवा है। उन्होंने भगवान बुद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि शिष्य में श्रद्धा, भक्ति और विश्वास हो तो ही गुरु को प्राप्त किया जा सकता है। दिसंबर में 108 कुंडीय यज्ञ किया जाएगा रिटायर प्रधान पाठक डीआर सोनबोइर ने गुरुदेव और गायत्री परिवार के युग निर्माण अभियान की जानकारी दी। डीके कलिहारी ने दिसंबर में होने वाले 108 कुंडीय यज्ञ की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें समयदान और अंशदान जरूरी है। इसके लिए घर-घर संपर्क करना होगा। कार्यक्रम में 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ हुआ। इसमें गायत्री परिवार के अलावा अन्य वर्गों ने भी भाग लिया। यज्ञ में अन्न प्राशन, विद्या आरंभ और जन्म दिवस संस्कार कराए गए। कार्यक्रम के अंत में भोजन प्रसादी वितरित की गई।


